
वॉशिंगटन और बीजिंग में चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब तीखे चिप वॉर की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। इसकी ताजा कड़ी में अमरीकी क्लाउड-कंप्यूटिंग सेवाओं तक चीनी पहुंच को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर अमरीका में गंभीरता से मंथन शुरू हो गया है। बाइडन प्रशासन अगर इस तरह के कदम उठाए जाते हैं तो इसका मतलब यह होगा कि अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमरीकी क्लाउड प्रदाताओं को उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिप्स का उपयोग करने वाली क्लाउड-कंप्यूटिंग सेवाएं चीनी ग्राहकों को प्रदान करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। इस प्रतिबंध के लग जाने से यह महत्वपूर्ण रास्ता भी चीन की कंपनियों के लिए बंद हो जाएगा। अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चेतावनी देते आए हैं कि चीन ने मौजूदा उन्नत चिप्स निर्यात नियंत्रण पर प्रतिबंधों से बचने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं का उपयोग कर इसकी भरपाई की होगी।
चीन ने लगाया गैलियम और जर्मेनियम के निर्यात पर प्रतिबंध
वाशिंगटन द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंध उसी दिन आए हैं जब चीन ने सेमीकंडक्टर के निर्माण के लिए आवश्यक दो दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर नियंत्रण लगाने का फैसला किया है।
चीन ने सोमवार को कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए एक अगस्त से दो दुर्लभ धातुएं गैलियम और जर्मेनियम समेत तमाम अन्य औद्योगिक कंपाउंड्स के निर्यात पर प्रतिबंध रहेगा और इनके निर्यात पर स्टेट काउंसिल यानी चीन की कैबिनेट से अनुमति लेनी होगी।
चीन के लिए बदलेंगे क्लाउड कंप्यूटिंग के मौजूदा नियम
क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं के मौजूदा नियमों के अनुसार ग्राहक उन्नत सेमीकंडक्टर्स खरीदे बिना भी इसकी शक्तिशाली कंप्यूटिंग क्षमताओं का फायदा उठा सकता है। इस तरह चीन पर एनवीडिया के उन्नत ए100 और एच100 चिप्स के प्रतिबंधों के बावजूद चीन मौजूदा नियमों की मदद से इनकी सेवाओं का फायदा उठा रहा था।
ट्रंप के समय शुरू हुआ चिप वॉर बाइडन ने बढ़ाया
चीन और अमरीका में चिप युद्ध पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में शुरू हुआ था। ट्रंप ने आपूर्तिकर्ताओं को विशेष लाइसेंस के बिना चीनी दिग्गज कंपनी हुआवेई को अमरीकी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके बनाए गए चिप्स बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद चीन को बढ़त हासिल करने से रोकने के लिए बाइडन प्रशासन ने भी तेजी से चीन पर उन्नत चिप्स के निर्यात प्रतिबंध लगाए और यूरोप और एशिया में सहयोगियों से भी ऐसा करने का आह्वान किया था। इससे चीन बौखलाया हुआ है।
भारत पर भी दिखेगा असर
चीन का ये कदम उस वक्त में आया है, जब पिछले महीने भारत और अमरीका के बीच चिप उत्पादन को लेकर एक अहम डील हुई है, जिसके तहत भारत में चिप का उत्पादन किया जाएगा। बाइडन प्रशासन ने अमरीका की दिग्गज चिप उत्पादक कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी को भारत में निवेश करने की इजाजत दी है।
लेकिन अगर दोनों महाशक्तियों में ये युद्ध लंबा खिंचता है, तो फिर दुर्लभ धातुओं की कीमत में भारी उछाल आएगा। दुर्लभ धातुओं की कीमत में उछाल आने का मतलब ये है कि हर एक इलेक्ट्रिक उपकरण, जैसे मोबाइल, मशीन या टेक्नोलॉजी से संबंधित सामानों की कीमत बढ़ जाएगी। साथ ही भारत की चिप निर्माण की महात्वाकांक्षाओं को भी नई चुनौतियों का सामना करना होगा।
डॉलर को छोडऩे का समय
दोनों देशों में ट्रेड वॉर का असर एससीओ समिट में भी दिखाई दिया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ सम्मेलन के दौरान डॉलर को त्यागने का प्रस्ताव दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नए शीत युद्ध को शुरू करने की कोशिशों का सामना करने की जरूरत है। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की भी बात कही।
Published on:
04 Jul 2023 11:42 pm
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