
गैस स्टोव (File Photo)
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के दौर में दुनिया जिस 'नाले की गैस' यानी मीथेन (Methane) को सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में गिनती है, वही अब ऊर्जा का नया खजाना बन सकती है। अमेरिका (United States of America) की ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. संजय सेनानायके के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक बड़ी खोज का दावा किया है, जिससे मीथेन की समस्या का समाधान हो सकता है।
अमेरिका की ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने एक बहुत सस्ता और अनोखा कैटलिस्ट यानी उत्प्रेरक विकसित किया है जो मीथेन गैस को तरल ईंधन मेथनॉल में बदल सकता है और वो भी कम खर्च में। इस खोज को 'एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स' जर्नल में प्रकाशित किया गया है और इसके कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बकायदा पेटेंट भी फाइल कर दिया गया है।
कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में मीथेन वातावरण को कई गुना तेज़ी से गर्म करती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वैश्विक तापमान वृद्धि में करीब 30% योगदान अकेले मीथेन का है। तेल और गैस क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में यह गैस या तो हवा में छोड़ दी जाती है या जला दी जाती है, क्योंकि उसे पाइपलाइन से बाजार तक पहुंचाना महंगा पड़ता है।
डॉ. सेनानायके की टीम ने मोलिब्डेनम डाइसल्फाइड नामक पदार्थ का इस्तेमाल किया है। यह न सिर्फ सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, बल्कि 100 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर मीथेन को मेथनॉल में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। अब तक ऐसे काम के लिए पैलेडियम और रोडियम जैसी बेहद महंगी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
प्राकृतिक गैस में मौजूद सल्फर पारंपरिक उत्प्रेरकों को खराब कर देता है, लेकिन यह नया उत्प्रेरक सल्फर से प्रभावित नहीं होता। इसके विपरीत प्रयोगों में पाया गया कि इस्तेमाल के दौरान इसकी क्षमता और मजबूत होती जाती है। यानी इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत ऊर्जा आयात पर भारी खर्च करता है और साथ ही मीथेन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य पर भी काम कर रहा है। अगर यह खोज व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है तो लैंडफिल, बायोगैस संयंत्रों और कृषि अपशिष्ट से निकलने वाली मीथेन को सीधे मेथनॉल में बदलकर ईंधन बनाया जा सकेगा। इससे कचरा घटेगा, प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा का नया स्रोत भी मिलेगा।
Updated on:
04 Jul 2026 02:44 am
Published on:
04 Jul 2026 02:34 am
