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रूसी सैनिकों को ट्रेनिंग देने का मामला, बड़ी साजिश की भनक लगते ही चीन के राजदूत को जर्मनी ने किया तलब

Germany calls Chinese ambassador: जर्मनी ने चीन के राजदूत को तुरंत बुलाकर बात की मांग की है। रूस के सैनिकों को ट्रेनिंग देने के आरोपों के बीच जर्मनी ने कहा - चीन की मदद रूस की जंग को बढ़ावा दे रही है और हमारी सुरक्षा को खतरा है। पूरी खबर पढ़ें।
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भारत

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Mukul Kumar

Jul 03, 2026

Russian President Vladimir Putin landed in China and was welcomed by Xi Jinping.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिल अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ। (Photo- IANS)

चीन के प्रति जर्मनी का सख्त रूख देखने को मिला है। रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की बढ़ती मदद को लेकर जर्मनी ने चीनी राजदूत को तुरंत बुलाकर बात करने की मांग की है।

जर्मनी ने कहा कि चीन अगर रूस की मदद करता रहा तो यूरोप की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडराएगा। यह मामला अब सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की चिंता बन गया है।

जर्मनी का डिप्लोमैटिक ऐक्शन

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। स्पीगल मैगजीन की रिपोर्ट के आधार पर जर्मनी ने तुरंत कार्रवाई की। जर्मनी ने साफ कहा- रूस को युद्ध जारी रखने में जो भी मदद मिलेगी, वो हमारी सुरक्षा के लिए खतरा है।

विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा- चीन का रूस को बढ़ता समर्थन हमारे लिए चिंता की बात है। बता दें कि जर्मनी मानता है कि चीन अब रूस की सबसे बड़ी मददगार बन चुका है, जो यूक्रेन में चल रही जंग को और लंबा खींच रहा है।

रिपोर्ट्स में क्या खुलासा हुआ?

दो दिन पहले रॉयटर्स के हवाले से खबर आई थी कि पिछले साल चीन ने रूसी सैनिकों को गुप्त रूप से ट्रेनिंग दी थी। ये ट्रेनिंग रूसी रक्षा मंत्री के व्यक्तिगत मंजूरी के साथ हुई थी। अब स्पीगल ने भी इसी तरह की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चीन की भूमिका साफ दिख रही है।

जर्मनी के लिए ये रिपोर्ट्स कोई छोटी-मोटी बात नहीं हैं। वो इसे यूरोप की शांति के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। अगर चीन रूस को सैन्य सहायता देता रहा तो युद्ध और लंबा चलेगा, जिसका असर जर्मनी समेत पूरे यूरोप पर पड़ेगा।

चीन की क्या है प्रतिक्रिया?

चीनी दूतावास से शुक्रवार को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। पहले चीन ने ऐसी सभी खबरों को बेबुनियाद बताया था। लेकिन जर्मनी अब सबूतों के साथ आगे बढ़ रहा है और चीन से जवाब मांग रहा है।

बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ यूरोप का नहीं रहा। इसमें चीन की भूमिका बढ़ने से पूरी दुनिया का संतुलन बिगड़ रहा है। जर्मनी जैसे देश, जो यूक्रेन का खुलकर साथ दे रहे हैं, अब चीन को भी घेरने की कोशिश कर रहे हैं।