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Donald Trump का जंग के बीच चीन दौरा और होर्मुज विवाद कनेक्शन, जानिए ड्रैगन ने क्या कहा

Geopolitics : मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव के बीच चीन ने स्पष्ट किया है कि डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे का होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद से कोई संबंध नहीं है। दोनों महाशक्तियों के बीच दौरे की तारीखों पर बातचीत जारी है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 17, 2026

Chinese Foreign Ministry spokesman Lin Jian

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान। (फोटो: ANI)

US-China Relations : मध्य पूर्व में युद्ध और बढ़ते तनाव (Middle East Tension) के बीच चीन (China) ने मंगलवार को एक बेहद अहम बयान जारी किया है। चीनी विदेश मंत्रालय (Chinese Foreign Ministry) ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आगामी बीजिंग दौरे का होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने या वहां चल रहे विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। ड्रैगन ने मीडिया में चल रही उन तमाम भ्रामक खबरों (Media Reports) को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह झूठा करार दिया है। अमेरिका और चीन (US and China) के उच्चाधिकारी अभी भी इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे की तारीखों (Visit Dates) को लेकर आपसी संचार बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X Platform) पर एक आधिकारिक पोस्ट में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका (United States) ने खुद मीडिया की झूठी और फर्जी रिपोर्टों पर अपना विस्तृत स्पष्टीकरण (Clarification) दुनिया के सामने रख दिया है। इन दोनों महाशक्तियों के बीच लगातार सकारात्मक संवाद (Positive Communication) जारी है।

चीन दे रहा है ईरान और अन्य देशों को मदद (Humanitarian Aid)

इसी बीच कूटनीतिक सरगर्मी बढ़ाते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक बड़ा ऐलान किया है। चीन ने अमेरिका के कट्टर विरोधी माने जाने वाले देशों जैसे ईरान, जॉर्डन, लेबनान और इराक को तत्काल मानवीय सहायता देने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मध्य पूर्व सुलग रहा है। चीन का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है ताकि किसी बड़े संकट से बचा जा सके।

ट्रंप ने क्यों टालना चाहा दौरा? (Postponed Visit)

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह युद्ध की मौजूदा स्थिति के कारण इस महीने के अंत में होने वाले अपने बीजिंग दौरे को टालने का अनुरोध कर चुके हैं। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले ट्रंप ने चीन को एक तरह से अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर चीन ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी को रोकने के लिए अपने युद्धपोत नहीं भेजता है, तो वह चीन के साथ अपनी बैठक को टाल सकते हैं। यह ब्लॉकेड वैश्विक तेल बाजारों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

शी जिनपिंग के साथ रिश्तों पर ट्रंप का रुख (Good Relationship)

भले ही अमेरिका और चीन के बीच बयानबाजी चलती रहती हो, लेकिन ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों को लेकर बहुत ही सकारात्मक बात कही है। ट्रंप ने कहा कि वे चीन जाना पसंद करेंगे, लेकिन मौजूदा युद्ध के हालात की वजह से वे फिलहाल अपने देश में रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे शी जिनपिंग से मिलने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि दोनों के बीच बेहतरीन रिश्ते हैं।

अमेरिका के साथ रिश्ते सामान्य रखना चाहता है चीन

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा और मध्य पूर्व का युद्ध, विश्व की महाशक्तियों के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है। चीन का यह बयान दिखाता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्ते सामान्य रखना चाहता है, लेकिन साथ ही ईरान को मदद देकर अपना प्रभुत्व भी कायम कर रहा है।

व्हाइट हाउस और बीजिंग के बीच कनेक्शन

आने वाले दिनों में यह देखना सबसे महत्वपूर्ण होगा कि व्हाइट हाउस और बीजिंग मिलकर ट्रंप के दौरे की कौन सी नई तारीख तय करते हैं। साथ ही क्या अमेरिका, होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद को सुलझाने के लिए चीन की सैन्य सहायता या युद्धपोत हासिल करने में सफल हो पाएगा या नहीं।

अघोषित शीत युद्ध का साफ संकेत

बहरहाल,एक तरफ जहां ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की सप्लाई को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन की ओर से ईरान, इराक और लेबनान ,जो सीधे तौर पर अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं, उन्हें मानवीय मदद देना दोनों सुपरपावर के बीच एक पर्दे के पीछे चल रहे अघोषित शीत युद्ध का साफ संकेत देता है। ( इनपुट: ANI )