
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo- IANS)
Donald Trump on China: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिकी सीनेट से क्लैरिटी एक्ट जल्द पारित करने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम उनके समर्थक सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में उठाया जाना चाहिए। उनका दावा है कि चीन और कई अन्य देश डिजिटल फाइनेंस पर कंट्रोल हासिल करना चाहते हैं। साथ ही वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी अमेरिका को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि फिलहाल एआई के क्षेत्र में अमेरिका आगे है लेकिन चीन कड़ी चुनौती दे रहा है। उन्होंने सीनेट से अपील करते हुए कहा कि चीन को इन दोनों क्षेत्रों में जीतने नहीं देना चाहिए।
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी की रेस देख रही है। उन्होंने साफ कहा कि चीन समेत कुछ दूसरे देश भी डिजिटल मुद्रा और ऑनलाइन फाइनेंस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर अमेरिका ने समय रहते नहीं रोका तो भविष्य में ये देश अमेरिका को पीछे छोड़ सकते हैं।
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अमेरिका आगे है, लेकिन चीन बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा- हमें उन्हें इन दोनों क्षेत्रों में जीत नहीं देनी चाहिए।
ट्रंप का संदेश यह है कि क्लैरिटी एक्ट पास हो जाने से अमेरिका की कंपनियों और सरकार को मजबूत कानूनी ढांचा मिलेगा, जिससे विदेशी दखलअंदाजी को रोका जा सके।
आसान भाषा में समझें तो यह कानून अमेरिका को डिजिटल दुनिया में मजबूत बनाने वाला है। इसमें डिजिटल पेमेंट, क्रिप्टोकरेंसी और AI टेक्नोलॉजी पर सख्त नियम बनाए जा सकते हैं।
ट्रंप का तर्क है कि बिना मजबूत कानून के चीन जैसे देश अपनी कंपनियों के जरिए अमेरिकी बाजार में घुसपैठ कर सकते हैं। अमेरिका में कई सीनेटर पहले से ही चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों पर पाबंदी लगाने की बात कर रहे हैं।
यह मुद्दा सिर्फ अमेरिका-चीन तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया में देश अब AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे हैं। अगर अमेरिका चीन को रोकने में कामयाब रहा तो वैश्विक टेक्नोलॉजी बाजार में संतुलन बना रहेगा।
Updated on:
13 Jul 2026 09:57 pm
Published on:
13 Jul 2026 08:20 pm
