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LPG किल्लत का पर्दाफाश करना पत्रकार को पड़ा भारी: पुलिस ने सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, फिर…

Journalist Assault Pakistan: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक पत्रकार को दौड़ा-दौड़ाकर सड़क पर पीटा गया, क्योंकि उसने LPG की कथित स्मगलिंग के बारे में एक सेंसिटिव न्यूज अपलोड की थी।

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 20, 2026

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LPG किल्लत: पाकिस्तान में पुलिस ने पत्रकार को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा (सोर्स: आईएएनएस)

LPG Smuggling Karachi Port: पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सच उजागर करना एक पत्रकार के लिए भारी पड़ गया। सीनियर पत्रकार नादिर खान ने जैसे ही कराची पोर्ट पर LPG की कथित स्मगलिंग से जुड़ी एक संवेदनशील खबर प्रकाशित की, महज आधे घंटे के भीतर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

कथित तौर पर इससे पहले उन्हें सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जिसने प्रेस की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना की कड़ी निंदा ‘Human Rights Council’ ने भी की है और इसे पत्रकारों को डराने की कोशिश बताया है। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि सच बोलने की कीमत कितनी भारी हो सकती है, इसकी भी खौफनाक तस्वीर पेश करता है।

बता दें इन दिनों अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण गैस और तेल (एनर्जी) को लेकर पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा हुआ है।

प्रेस की आजादी पर सीधा हमला; पत्रकारों को डराने की कोशिश

NCCIA के बर्ताव पर चिंता जताते हुए, पाकिस्तान की HRC ने कहा, “यह बहुत हैरानी की बात है कि इतनी सेंसिटिव और बड़ी खबर को बिना किसी ठोस जांच के कम समय में गलत साबित कर दिया गया, और इसके बजाय पत्रकार को निशाना बनाया गया।”

काउंसिल ने कहा कि "खबर में बताए गए दो बड़े नामों को बचाने के लिए इस तरह से लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों का इस्तेमाल प्रेस की आजादी पर सीधा हमला और पत्रकारों को डराने की कोशिश है।”

कराची प्रेस क्लब को सपोर्ट करते हुए, राइट्स बॉडी ने मांग की कि “पत्रकार नादिर खान के खिलाफ दर्ज गैर-कानूनी केस तुरंत खारिज किया जाए और खबर में दिखाए गए फैक्ट्स की ट्रांसपेरेंट जांच की जाए।”

इस बीच, कराची प्रेस क्लब (KPC) ने नादिर के खिलाफ दर्ज केस की निंदा करते हुए इसे प्रेस की आजादी और बोलने की आजादी के अधिकार पर हमला बताया।

वहां के मीडिया का क्या है कहना?

एक लोकल मीडिया ने बताया कि कराची प्रेस क्लब (KPC) प्रेसिडेंट फाजिल जमीली, सेक्रेटरी असलम खान और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्यों ने बिना पहले से नोटिस दिए या कोई जांच किए केस दर्ज करने के लिए NCCIA की आलोचना की।

KPC के मुताबिक, यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन और इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म को दबाने की पहले से सोची-समझी कोशिश के बराबर है।

वहीं पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट जियो न्यूज ने कहा, “यह केस ऐसे समय में दर्ज किया गया है जब देश को मौजूदा चुनौतियों की वजह से एकता की ज़रूरत है। केस बिना किसी नोटिस या पूछताछ के, कानूनी प्रक्रियाओं को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते हुए दर्ज किया गया था, और यह पहले से सोची-समझी और जानबूझकर की गई कार्रवाई लगती है। इस तरह के उपायों का मकसद न केवल प्रेस की आजादी को दबाना है, बल्कि उन पत्रकारों को परेशान करना भी है जो सच सामने लाते हैं।”

इसके अलावा, पाकिस्तान फ़ेडरल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स-दस्तूर (PFUJ-D) ने भी इस केस की आलोचना की, और इसे बोलने की आज़ादी को कमजोर करने की साजिश बताया।

एक जॉइंट स्टेटमेंट में, PFUJ-D के प्रेसिडेंट हाजी मुहम्मद नवाज रजा, सेक्रेटरी जनरल एएच खानजादा और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्यों ने नादिर के खिलाफ केस दर्ज करने के तरीके पर गहरी चिंता जताई।

जियो न्यूज ने PFUJ-D के पदाधिकारियों के हवाले से कहा, “बिना सही प्रक्रिया के केस दर्ज करना पत्रकारिता की आज़ादी के लिए एक गंभीर खतरा है और ऐसा लगता है कि यह रिपोर्टर को डराने की कोशिश है।”