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Free Train Journey: शख्स सालभर करता रहा ट्रेन में मुफ्त में सफर, रेलवे के नियम को ऐसे बनाया फ्री में यात्रा के लिए हथियार

Train Delay Refund: एक शख्स ने तो कमाल ही कर दिया उसने ऐसा जुगाड़ निकाला कि पूरे साल बिना एक पैसा खर्च किए ट्रेन में सफर किया। आइए जानते हैं पूरी कहानी।

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भारत

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Devika Chatraj

Mar 24, 2025

Free of Cost Travel: रेलवे आज भी लोगों के लिए यात्रा का सबसे पसंदीदा और किफायती विकल्प बना हुआ है। दूरदराज के इलाकों में आने-जाने के लिए लोग सबसे पहले ट्रेन के टिकट की उपलब्धता जांचते हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ट्रेन में सफर का आनंद तो लेते हैं, लेकिन टिकट लेने से बचते हैं। बिना टिकट यात्रा (Free Train Journey) करते हुए वे खूब मज़े करते हैं, पर अगर टिकट चेकिंग में पकड़े गए तो मोटा जुर्माना देना पड़ता है। लेकिन एक शख्स ने तो कमाल ही कर दिया उसने ऐसा जुगाड़ निकाला कि पूरे साल बिना एक पैसा खर्च किए ट्रेन में सफर किया। इस तरह उसने लगभग 1.06 लाख रुपये के किराये की बचत कर ली। हैरानी की बात यह है कि उसके इस तरीके को जानने के बाद भी रेलवे उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सका।

कैसे किया फ्री में सफर?

29 साल के एड वाइज एक पर्सनल फाइनेंस राइटर, ने ट्रेनों के समय और उनकी देरी के रुझानों को गहराई से समझ लिया। उसे यह बात खटकी कि ब्रिटिश रेलवे में अगर ट्रेन समय से पीछे चलती है, तो यात्रियों को रिफंड का हक मिलता है। इसी नियम को हथियार बनाकर उसने एक चतुर योजना रची। एड ने देखा कि ट्रेनों के लेट होने की वजहें अक्सर एक जैसी होती हैं। कभी हड़तालों का शोर, कभी मेंटेनेंस की मजबूरी, तो कभी मौसम का दखल। इस समझ को आधार बनाकर उन्होंने अपनी सारी यात्राएं तय कीं। वे सिर्फ उन ट्रेनों के टिकट लेते थे, जिनके देर होने का अंदाजा पहले से था, ताकि रिफंड की राशि उनकी जेब में आ सके। इस तरह उन्होंने सफर को अपने फायदे का सौदा बना डाला।

ब्रिटेन रेलवे का ये है नियम

ब्रिटेन में ट्रेन देरी के नियम कुछ इस तरह हैं, अगर ट्रेन 15 मिनट लेट हो तो 25% रिफंड, 30 मिनट की देरी पर 50% पैसा वापस, और एक घंटे से ज्यादा की देरी पर पूरा किराया लौटा दिया जाता है। एड वाइज ने इस नीति को अपने लिए सोने की खान बना लिया। उसने गौर किया कि हड़ताल, मेंटेनेंस का काम और खराब मौसम ही ट्रेनों को देर करने के सबसे बड़े कारण हैं। इसी जानकारी के दम पर उन्होंने अपनी यात्राओं का समय ऐसा चुना कि ट्रेनों के लेट होने की गुंजाइश ज्यादा रहे और वे रिफंड का सबसे बड़ा हिस्सा हासिल कर सकें। इस तरह उन्होंने नियमों को अपने हक में चतुराई से भुनाया।

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