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गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ रहा तालिबान का प्रभाव, कट्टरपंथियों ने लड़कियों के स्कूल में लगाई आग

अफगानिस्तान में आएदिन होने वाली घटनाएं अब गिलगित-बाल्टिस्तान में भी होने लगी हैं। यहां लड़कियों की शिक्षा के विरोधी लड़कियों के स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। यहां एक स्कूल को आग के हवाले कर दिया गया। इस स्कूल में 68 छात्राएं शिक्षा ले रही थीं।

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Archana Keshri

Nov 12, 2022

Gilgit-Baltistan witnesses growing influence of Taliban, Radicals set fire to girls' school

Gilgit-Baltistan witnesses growing influence of Taliban, Radicals set fire to girls' school

पाकिस्तान की प्रतिगामी नीतियों के बीच, गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में तालिबान के बढ़ते प्रभाव को देखा जा सकता है। इस बात का अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है जब गिलगित-बाल्टिस्तान के दायमेर जिले में लड़कियों के एक स्कूल को अज्ञात बदमाशों के एक समूह ने मंगलवार तड़के जला दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार आगजनी करने वाले ने ड्यूटी पर तैनात स्कूल गार्ड का अपहरण कर लिया और स्कूल में आग लगा दी। अब तक ऐसी घटना अफगानिस्तान में ही देखी जा रही थी, मगर अब ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में भी होने लगी हैं।


लड़कियों की शिक्षा के विरोधी कठमुल्ला और कट्टरपंथी गुट लड़कियों के स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में कुल 68 छात्राओं का नामांकन है। कई महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस हमले का विरोध किया और गिलगित सरकार से तुरंत से तुरंत एक्शन लेने की मांग की है। वहीं, इस घटा पर पाकिस्तमान के मानवाधिकार आयोग ने भी दुख जताते हुए गिलगित सरकार से लड़कियों के स्कूलों की सुरक्षा करने की अपील की है।


स्थानीय मीडिया ने बताया, "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) महिला विंग के उपाध्यक्ष और शिक्षा के संसदीय सचिव, जीबी सुराया जमां ने छात्राओं को शिक्षा से दूर रखने की साजिश और हमले की निंदा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" वहीं, शब्बीर अहमद कुरैशी (दायमेर यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष) के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने सड़कों पर इस घटना का विरोध किया और दोषियों को पकड़ने में सरकार की निष्क्रियता के लिए सरकार की आलोचना की।


स्थानीय लोगों ने बताया कि 2018 में बदमाशों ने जिले भर में 13 कन्या विद्यालयों को आग के हवाले कर दिया था लेकिन उस समय भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय स्थानीय लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बताया जा रहा है कि तालिबान से जुड़े एक समूह (मुजाहिदीन गिलगित-बाल्टिस्तान और कोहिस्तान) ने स्कूल में आग लगा दी थी।


बता दें, तालिबान महिलाओं की किसी भी प्रगतिशील गतिविधियों के खिलाफ है, शरिया कानून का पालन करता है और अपनी प्रासंगिकता दिखाने के लिए इस तरह के हिंसक कार्य करता है। अफसोस की बात है कि पाकिस्तान प्रशासन इसे नियंत्रित करने में असमर्थ है। हाल के दिनों में लड़कियों के संस्थानों और आयोजनों पर हमले बढ़े हैं जो तालिबान के बढ़ते प्रभाव और उसके अनुयायियों की प्रतिगामी मानसिकता को दर्शाता है।


स्थानीय मीडिया ने बताया कि पिछले महीने, तालिबान आतंकवादियों के एक समूह ने गिलगित-बाल्टिस्तान के वरिष्ठ मंत्री कर्नल ओबैदुल्ला का अपहरण कर लिया और उन्हें बंधक बना लिया ताकि गिलगित-बाल्टिस्तान में आयोजित बालिका खेल उत्सव को रोका जा सके और स्थानीय लोगों को धमकाया जा सके। दायमेर तालिबान और उसकी प्रतिगामी महिला विरोधी नीतियों से काफी प्रभावित है। इसके कारण, दायमेर क्षेत्र में शिक्षा और विकास दोनों का अभाव है।


गिलगित-बाल्टिस्तान दायमेर क्षेत्र में अराजकता के पीछे का कारण पाक सरकार की विफलता है जो तालिबान के विकास का विरोध करने में असमर्थ रही है। पाक प्रतिष्ठान और प्रशासन स्थानीय लोगों को सुरक्षा और बुनियादी अधिकार नहीं दे सकता। वहीं यह हमला गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय मुद्दों के प्रति पाकिस्तान की उदासीनता को और उजागर करता है। दियामेर में पिछले कुछ महीनों में 10 से अधिक लड़कियों के स्कूलों में आगजनी की घटनाएं हुई हैं, लेकिन अपराधी अभी भी खुले घूम रहे हैं।


हालांकि, दायमेर में हुई इस घटना के बाद भी गिलगित पाकिस्तान के लोगों को डराने-धमकाने में आतंकी नाकाम रहे। स्कूल को फिर से बनया जा रहा है। स्कूल को बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। दायमेर प्रशासन और वहां के लोगों का मानना है कि इस तरह से अपराधियों को एक झटका मिलेगा।

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