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Global Warming: सफेद रंग से रंग डालिए छत, हजारों रुपए की बचत के साथ पर्यावरण का होगा फायदा

Global Warming: एक नई रिसर्च से पता चला है कि घरों की छत को सफेद रंगने से सेहत तो ठीक ही रहती है साथ ही पैसे भी कम खर्च करने पड़ते हैं। यही नहीं इस जुगत से ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार भी धीमी हो सकती है।

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Painting roof white will benefit environment

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Global Warming: नई दिल्ली। पारा चढ़ने के साथ-साथ घर गर्म होने लगे हैं, इसका एक कारण गहरे रंग की छतों से आने वाली गर्मी भी है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक शोध के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि अगर घर की छत सफेद हो तो लगभग 700 डॉलर (लगभग 40,000 रुपए) की सालाना बचत होती है, घरों को ठंडा रखने में कम बिजली खर्च होती है। पिछले साल न्यू साउथ वेल्स राज्य में बिजली का औसत खर्च 1,827 डॉलर रहा लेकिन जिनकी छतें हल्के रंग की थीं, उन्होंने 694 डॉलर तक कम बिल दिया। गर्म देशों में, इमारतों को अक्सर सफेद रंग से रंगा जाता है, साथ ही उनमें छोटी खिड़कियां और मोटी पत्थर की दीवारें होती हैं। इन्हीं उपायों की ओर लौटने की जरूरत है।

कितना गिर सकता है घर का तापमान

किसी इमारत की छत को सफेद रंग से रंगने से सूरज की रोशनी परावर्तित होती है और उसका तापमान कम हो जाता है।
ऐसे अनुमान भी हैं कि अगर दुनिया भर के हर बड़े शहर में छतों पर कूलिंग पेंट का इस्तेमाल किया जाए तो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन (Global Warming) में संभावित कमी आ सकती है। बर्कले लैब का कहना है कि दुनिया भर में परावर्तक छत का उपयोग 24 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड की भरपाई के बराबर वैश्विक शीतलन प्रभाव पैदा कर सकता है, जो 20 वर्षों के लिए 300 मिलियन कारों को सड़क से हटाने के बराबर है।

शहरों में घटाना होगा कार्बन उत्सर्जन

ऊर्जा से संबंधित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में दुनिया के शहरों 75% हिस्सा है। ईंट, कंक्रीट, टरमैक और टाइलें घास और पेड़ों से ढकी धरती की तुलना में अधिक गर्मी जमा कर सकते हैं, और समय के साथ इसे धीरे-धीरे छोड़ सकते हैं। इससे रात भर भी हवा गर्म रहती है। परिवहन, विनिर्माण और एयर कंडीशनिंग जैसे कई कारण गर्मी बढ़ाते हैं। तपते शहर सिर्फ असहज नहीं हैं। वे खतरनाक हैं। अकेले ऑस्ट्रेलिया में अन्य सभी प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में अत्यधिक गर्मी से अधिक लोगों की मौत होती है ।

भारत में भी मिल चुकी है कामयाबी

दुनिया के कई हिस्सों में घरों की छतों को सफेद रंगने के अभियान चल रहे हैं। भारत में 2009 में एक समाजसेवी संस्था ने गुजरात के अहमदाबाद में गरीब बस्तियों में ऐसा करना शुरू किया था। इसमें सफेद पेंट, हरी छतें, एयरलाइट जैसे प्रयोग शामिल थे। बाद में इसे राजस्थान के जोधपुर सहित कई जगहों पर दोहराया गया, जिसके अच्छे नतीजे मिले। वर्ष 2021 में घरेलू श्रमिक संगठनों का एक नेटवर्क होमनेट साउथ एशिया ने भारत, बांग्लादेश और नेपाल में मलिन बस्तियों में सर्वेक्षण से पता लगाया कि बढ़ता तापमान लोगों की आय घटाता है और उनकी उत्पादकता भी कम होती है।

शहरों को रखें ठंडा

ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) को कम करने के लिए शहरों में सफेद छतों का होना बहुत जरूरी है। जलवायु परिवर्तन जितना ज्यादा बढ़ेगा, शहर उतने ज्यादा गर्म होते जाएंगे। गर्मी में तपते शहर जीवन को सिर्फ मुश्किल नहीं बनाते, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।

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