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‘ईरान को फिर अपने पैरों पर खड़ा होने में लगेंगे 20 साल’ ट्रंप का बड़ा बयान, युद्धविराम पर कह दी बड़ी बात

ईरान और अमेरिका के बीच शांति-वार्ता का पहला दौर विफल रहा, लेकिन जल्द ही दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की ओर इशारा दिया। इसके साथ ही ट्रंप ने युद्धविराम पर भी बड़ी बात कह दी है।

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भारत

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Tanay Mishra

Apr 15, 2026

Donald Trump

Donald Trump (Photo - Washington Post)

अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच पाकिस्तान (Pakistan) के इस्लामाबाद (Islamabad) में शांति-वार्ता का पहला दौर विफल रहा जिससे युद्ध के फिर शुरू होने का खतरा काफी बढ़ गया है। 2 हफ्ते का सीज़फायर कुछ ही दिन में खत्म हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी लगातार ईरान को समझौते पर सहमत होने के लिए धमकियाँ दे रहे हैं, तो वहीं ईरान भी अमेरिका के आगे झुक नहीं रहा है। ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी कर दी, लेकिन इसके बावजूद करीब 20 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रे हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप को अपने सहयोगी देशों का भी साथ नहीं मिल रहा है। इसी बीच अब ट्रंप ने युद्धविराम पर एक बड़ी बात कह दी है।

जल्द हो सकता है युद्धविराम

ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ईरान और अमेरिका में शांति-वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिन में एक बार फिर पाकिस्तान में हो सकता है। हालांकि अभी तक इस बारे में आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ट्रंप ने बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका से समझौता करने के लिए ईरान काफी उत्सुक है।

ईरान को फिर अपने पैरों पर खड़ा होने में लगेंगे 20 साल

ट्रंप ने युद्ध की वजह से ईरान को हुए नुकसान और वर्तमान स्थिति पर भी बात की। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की वजह से ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और वो काफी पिछड़ गया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को फिर अपने पैरों पर खड़ा होने और देश को वापस बनाने में 20 साल लग जाएंगे।

परमाणु प्रोग्राम के निलंबन पर नहीं बनी सहमति

शांति-वार्ता के पहले दौर में ईरान ने अपने परमाणु प्रोग्राम को 5 साल के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम को 20 साल के लिए निलंबित करें। इसी वजह से सहमति नहीं बनी, क्योंकि अमेरिका चाहता है कि ईरान आश्वासन दे कि वो कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि ईरान शुरू से ही कह रहा है कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, सिर्फ परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है जिससे उसका इस्तेमाल देश के लिए किया जा सके। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच समझौते के विषय में अन्य कई प्रतिबंध भी जुड़े हैं, जैसे ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को विदेश भेजना और परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह रोकना।