द्विपक्षीय संबंधों के सर्वकालिक निम्न स्तर पर होने के बावजूद 1992 से चली आ रही परंपरा के निर्वहन में भारत और पाकिस्तान ने रविवार को उन परमाणु प्रतिष्ठानों (Nuclear installations) की सूचियों का आदान-प्रदान किया, जिन पर शत्रुता की स्थिति में हमला नहीं किया जा सकता है। साथ ही एक-दूसरे की हिरासत में असैन्य कैदियों और मछुआरों (Lists of Prisoners)की सूची भी साझा की गई।
भारत और पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे समझौते के तहत रविवार को अपनी हिरासत में असैन्य कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। कॉन्सुलर एक्सेस पर 2008 के समझौते के प्रावधानों के तहत, ऐसी सूचियों का आदान-प्रदान हर साल 01 जनवरी और 01 जुलाई को किया जाता है। साथ ही भारत और पाकिस्तान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी भी साझा की जो साल में एक बार साझा होती है।
भारत ने की कैदियों को कॉन्सुलर सुविधा की मांग
भारत ने 339 पाकिस्तानी नागरिक कैदियों और 95 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची साझा की है जो वर्तमान में भारतीय हिरासत में हैं। इसी तरह, पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में 51 नागरिक कैदियों और 654 मछुआरों की सूची साझा की है, जो भारतीय हैं या भारतीय माने जाते हैं। भारत सरकार ने आम कैदियों, लापता सैन्यकर्मियों, मछुआरों को उनकी नाव सहित जल्दी रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। इस संदर्भ में भारत ने 631 मछुआरों और दो आम कैदियों की रिहाई और वापसी की प्रक्रिया तेज करने के लिए कहा साथ ही बचे हुए 30 मछुआरों और 22 आम कैदियों को कॉन्सुलर सुविधा देने की मांग की।
परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी भी की साझा
इसी तरह, दोनों पक्षों ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक साथ परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की सूची का भी आदान-प्रदान किया। भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं के खिलाफ हमले के निषेध पर समझौते के तहत सूची का आदान-प्रदान किया गया था। भारत और पाकिस्तान के बीच 31 दिसंबर 1988 को ये समझौता हुआ था जो 27 जनवरी 1991 को लागू हुआ। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे को हर साल एक जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में सूचित करते हैं। इस साल 32वीं बार ये सूची साझा की गई है। पहली सूची 1992 में सौंपी गई थी।
यह भी पढ़ें: