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अंधेरी कोठरी, सड़ा खाना, बेरहम पिटाई… लाओस में नरक की जिंदगी जी रहे थे भारतीय, ‘मोदी गारंटी ने इन्हें बचाया’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि विदेश में भी मोदी गारंटी (Modi Guarantee) काम करती है। उन्होंने लाओस से बचाए गए 17 भारतीयों की स्वदेश वापसी पर लाओस के अधिकारियों को धन्यवाद भी दिया।

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India rescues 17 Indians stranded in Laos

India rescues 17 Indians stranded in Laos

भारत ने लाओस (Laos) में फंसे अपने 17 नागरिकों को आखिरकार बचा लिया। लाओस में इन नागरिकों की जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई थी। इनसे वहां पर गैर कानूनी काम कराए जा रहे थे। इन 17 नागरिकों को लाओस से सुरक्षित बचाकर वापस भारत लाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा कि देश-विदेश हर जगह मोदी गारंटी काम करती है। इसके लिए उन्होंने लाओस में भारतीय दूतावास को शाबाशी दी और लाओस के अधिकारियों को धन्यवाद दिया। विदेश मंत्री ने भारतीयों को बहला-फुसला कर (Indians stranded in Laos) विदेश ले जाने को लेकर एक चेतावनी भी जारी की है साथ ही भारतीयों को भी इनसे बचने की सलाह दी है।

कैसे लाओस गए ये भारतीय

दरअसल इस स्केैम में उन भारतीयों को निशाना बनाया गया (Indians stranded in Laos) जो बेराजगार थे या जिन्हें ज्यादा वेतन की नौकरी चाहिए थे। मानव तस्करों के गिरोह ने इन भारतीयों को कंबोडिया (Cambodia) में रोजगार देने की झांसा दिया। उन्हें थाईलैंड में भी भेजने के सपने दिखाए। इन भारतीयों से कहा गया था कि उन्हें डिजिटल सेल्स और मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव या ग्राहक सहायता सेवा जैसी नौकरियां दिलवा देंगे। इसके बाद ये पीड़ित थाईलैंड (Thailand) पहुंचे लेकिन यहां इन्हें दूसरे पीड़ितों के साथ एक चीनी नागरिक के हाथों लाओस की सीमा पर भेज दिया गया। उनके पासपोर्ट तक छीन लिए गए फिर उन्हें अवैध तरीके से नाव से लाओस (Laos) ले जाया गया।

साइबर अपराध में जबरन धकेला

यहां ये सभी लोग लाओस में गोल्डन ट्रायंगल से (Golden Triangle) पहुंचे। यहां पर और भी भारतीय नागरिक पहले से ही फंसे हुए थे। यहां पर इन भारतीयों को साइबर अपराध ऑपरेशन में काम करने के लिए मजबूर किया गया।

मारपीट कर अधमरा तक किया

यहां (Indians stranded in Laos) इनसे फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने को कहा गया और उसके जरिए पश्चिमी देशों के लोगों को निशाना बनाने को कहा गया। इन सबसे ये मानव तस्कर ग्राहकों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए धोखे से पैसे ऐंठना चाहते थे। लेकिन जब भारतीयों ने इसका विरोध किया इने बेरहमी से पीटा गया इतना की कई लोग तो अधमरे तक हो गए।

यहां उनसे जबरन ये काम कराया जाता लेकिन वेतन के नाम पर उन्हें एक रुपया तक नहीं मिलता। इन्हें लगातार निगरानी में रखा जाता। उन्हें उस अंधेरे में डूबे कैदखाने से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। उन्हें पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता था और पूरे दिन में एक बार बेहद खराब खाना खाने को दिया जाता। कभी-कभी तो उन्हें सड़ा हुआ भोजन तक खाने को मिलता।

लगभग 100 भारतीय फंसे

भारतीय दूतावास (Indian Embassy In Laos) के मुताबिक लाओस में करीब 100 भारतीय इस नारकीय जीवन में फंसे हुए जल्द ही धीरे-धीरे सभी को बचा लिया जाएगा।

लाओस के अधिकारियों की मदद से बचाया

लाओस में भारतीय दूतावास (Indian Embassy In Laos) ने इन भारतीयों को बचाने के लिए लाओस के अधिकारियों की मदद ली। जिसेक बाद दो भारतीय युवाओं को बचाया जा सका। इसके बाद दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ऐसे झांसे (Indians stranded in Laos) से बचने के लिए सावधानी बरतने की अपील की और उन्हें अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध एजवाइजरी का हवाला दिया। जिसमें बताया गया कि थाईलैंड या लाओस में भारतीयों के आने पर वीजा रोजगार की अनुमति नहीं देता है और भारतीय नागरिकों को ऐसे वीजा के तहत लाओस अधिकारियों की तरफ से कोई वर्क परमिट जारी नहीं किया जाता है। दूतावास ने कहा कि कई भारतीयों को मानव तस्करी और कठिन हालातों से बचाया गया है।

विदेश मंत्री बोले- मोदी गारंटी विदेश में भी करती है काम

इसके बाद दूतावास ने एक साथ 17 भारतीयों को इस नारकीय जीवन से बचा लिया। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी और कहा कि "मोदी की गारंटी देश और विदेश में सभी के लिए काम करती है। लाओस में असुरक्षित और अवैध काम में फंसाए गए 17 भारतीय कामगार घर वापस आ रहे हैं। शाबाश भारतीय दूतावास। सुरक्षित वापसी के लिए समर्थन के लिए लाओस के अधिकारियों को धन्यवाद।"

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