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International Charity Day 2022: आज पूरी दुनिया मना रही है इंटरनेशनल चैरिटी डे, जानिए इतिहास और महत्व

International Charity Day 2022: दुनिया भर में आज के दिन को इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाया जाता है। हालांकि ज्यादातर आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी, इसलिए आइए चैरिटी डे के इतिहास और महत्व के बारे में जानते हैं।

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International Charity Day 2022: Today the whole world is celebrating International Charity Day, know history and importance

International Charity Day 2022: जहां भारत में आज यानी 5 सितंबर का दिन टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है, वहीं भारत सहित पूरी दुनिया में आज का दिन इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को समाजसेविका मदर टेरेसा की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने के लिए मनाया जाता है, जिसके तहत लोगों को 'दान' का महत्व बताया जाता है। दरअसल मदर टेरेसा गरीब, बीमार, अनाथ व असहाय लोगों की मदद करती थी, जिसके कारण वह मानवीय कार्यों को करने के लिए प्रसिद्द थी। इन मानवीय कार्यों के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

वैसे तो भारत में दान, पुण्य की परंपरा बहुत पहले से ही चली आ रही है। हमारे देश में यह भी माना जाता है कि दान से बड़ा कोई धर्म नहीं है, लेकिन इसको मनाने के लिए खास दिन नहीं बनाया गया था। साल 2012 संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया भर में मदर टेरेसा की पुण्यतिथि को इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाने की घोषणा की थी, जिसका समर्थन सभी देशों ने किया।


मदर टेरेसा एक रोमन कैथोलिक नन थी, जिन्होंने साल 1948 में अपनी इच्छा से भारत की नागरिकता लिया था। इसके बाद साल 1950 में उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जिसके जरिए सालों तक गरीब, बिमार, अनाथ, असहाय व मरते हुए लोगों की मदद की। साल 1979 में मदर टेरेसा नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया और अगले साल 1980 में भारत ने सर्बोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।


दरअसल इंटरनेशनल चैरिटी डे को दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में होने वाले दान (चैरिटी) से जुड़े कार्यक्रमों के लिए एक प्लेटफार्म है। यह दिन बताता है कि लोग अपनी भाग दौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा समय निकाल कर जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकते हैं, जिससे उन लोगों का भी जीवन सुधर जाए।


मदर टेरेसा ने आजीवन सेवा करने के लिए संकल्प लिया था, जिसके लिए उन्होंने 18 साल की उम्र में ही घर के साथ देश भी छोड़ दिया था। उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा करने में लगा दिया और साल 1997 में उनका दिल के दौरा पड़ने से निधन हो गया। मदर टेरेसा हमेशा कहती थीं कि "जो जीवन दूसरों के लिए न जिया जाए वो जीवन नहीं है।"