
Ali Khamenei (Photo - Washington Post)
ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बड़े कूटनीतिक और सैन्य फैसले के तहत यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। तेहरान की ओर से उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर यूरोपीय संघ के उस निर्णय की प्रतिक्रिया है, जिसमें उसने ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) को एक आतंकवादी संगठन करार दिया था।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में यूरोपीय संघ की इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के मौलिक सिद्धांतों के पूरी तरह से विपरीत बताया है। यह निर्णय ईरान के 2019 के उस कानून के अनुच्छेद 7 के आधार पर लिया गया है, जो उन सभी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का अधिकार देता है जो IRGC को आतंकी घोषित करने के अमेरिकी फैसले का किसी भी प्रकार से समर्थन करते हैं।
यूरोपीय संघ द्वारा IRGC को इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे संगठनों की श्रेणी में रखे जाने के बाद से तनाव चरम पर है। 1979 की क्रांति के बाद गठित IRGC ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों का प्रबंधन करता है। इस बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर यूरेनियम संवर्धन रोकने के लिए भारी दबाव बना रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह 10 से 15 दिनों के भीतर परमाणु समझौते पर शर्तों को स्वीकार करे। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि या तो कोई समझौता होगा या फिर ईरान के लिए स्थिति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हो जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान अब और अधिक क्षेत्र को अस्थिर करने वाली गतिविधियां जारी नहीं रख सकता।
वर्तमान स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी वायु और नौसेना की भारी तैनाती कर दी है। यह 2003 के इराक आक्रमण के बाद से इस क्षेत्र में की गई सबसे बड़ी सैन्य तैनाती मानी जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान पर सैन्य हमले के लिए पूरी तरह तैयार है और यह कार्रवाई इसी सप्ताह के अंत में शुरू हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस हमले को अधिकृत करने के संबंध में अंतिम फैसला नहीं लिया है। 'बोर्ड ऑफ पीस' की बैठक में भी ट्रंप ने अपनी धमकियों को दोहराते हुए कहा कि यदि ईरान सहयोग नहीं करता है, तो उसे एक बहुत ही अलग और कठिन रास्ते का सामना करना पड़ेगा।
Published on:
22 Feb 2026 07:37 am
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