
इज़रायल के खिलाफ ईरान ने बढ़ाए साइबर-अटैक्स (File Photo)
ईरान (Iran) और इज़रायल (Israel) के बीच चली आ रही दुश्मनी नहीं नहीं है। कई सालों से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है, जो समय के साथ कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ी ही है। पिछले साल जून में दोनों देशों के बीच 12 दिन जंग चली थी। इस साल 28 फरवरी को शुरू हुई जंग भी करीब 40 दिन चली थी। हालांकि दोनों देशों के बीच जंग अब सिर्फ हथियारों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि साइबर मोर्चे पर भी लड़ी जा रही है।
इज़रायल के एक सीनियर सिक्योरिटी अधिकारी ने कहा कि इस साल ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़रायल के हमले शुरू होने के बाद से ईरान की ओर से इज़रायल पर होने वाले साइबर-अटैक्स की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। इज़रायल के नेशनल साइबर डायरेक्टरेट के डायरेक्टर जनरल योसी कराडी ने जर्मनी के एक अखबार को बताया कि जून 2025 में ईरान के खिलाफ इज़रायली सैन्य ऑपरेशन के दौरान इज़रायली अधिकारियों ने लगभग 1,600 खतरनाक साइबर-अटैक्स के मामलों को दर्ज किया था। जून 2026 में साइबर-अटैक्स की संख्या बढ़कर लगभग 4,800 घटनाओं तक पहुंच गई है।
इंटरव्यू के अनुसार कराडी ने कहा कि साइबर-अटैक करने वाले कुछ ग्रुप बहुत शातिर हैं, जिनसे इज़रायल निपट सकता है, लेकिन उन्हें गंभीरता से लेना ज़रूरी है। साइबरस्पेस में कोई सीज़फ़ायर नहीं होता है, इसलिए यह जंग काफी गंभीर है।
कराडी ने कहा कि ईरान की तरफ से इज़रायल के ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, केंद्रीय संगठनों, छोटी से मध्यम आकार की कंपनियों और आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम पर साइबर-अटैक्स किए गए थे। उन्होंने बताया कि प्रभावित छोटी कंपनियों में क़ानूनी फर्म और अकाउंटिंग फर्म भी शामिल थीं। कराडी का मानना है कि ईरान की तरफ से इज़रायल के इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर-अटैक्स जारी रहने का खतरा है, लेकिन इज़रायल ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को रोकने में कामयाब रहा है। कराडी ने यह भी कहा कि ईरान आमतौर पर दूसरे देशों के खिलाफ हैकिंग कैंपेन चलाने से इनकार करता है, लेकिन खुद पर होने वाले हमलों की रिपोर्ट करता है।
Published on:
29 Jun 2026 11:45 am
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