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पाकिस्तान नहीं, चीन ने करवाया अमेरिका-ईरान सीजफायर: पहली बार आया सामने, कहा- ‘हमने 26 बार फोन पर की बात’

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से चीन शांति को बढ़ावा देने और लड़ाई रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

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चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और पाक प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ

US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच जारी 40 दिन से भीषण जंग आखिरकार थम गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित बड़े हमलों को रोकते हुए दो हफ्ते का सशर्त सीजफायर का ऐलान कर दिया। इस फैसले को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की शर्त से जोड़ा गया है। घोषणा के बाद दुनियाभर के बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई, जबकि ईरान ने भी अस्थायी स्वीकृति दे दी।

चीन की कूटनीति का कमाल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भले ही अपनी पीट थपथपा रहे हो, लेकिन असली भूमिका चीन ने निभाई है। खुद ट्रंप ने मंगलवार को एएफपी से बातचीत में कहा कि चीन ने ईरान को सीजफायर और बातचीत की मेज पर लाने में अहम मदद की।

चीन का दावा, दोनों विदेश मंत्रियों से 26 बार फोन पर हुई बात

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा, 'ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से चीन शांति को बढ़ावा देने और लड़ाई रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।' उन्होंने बताया कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों से 26 बार फोन पर बात की, जबकि मध्य पूर्व के लिए चीन के विशेष दूत ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए। माओ निंग ने आगे कहा कि चीन और पाकिस्तान ने खाड़ी व मध्य पूर्व में शांति के लिए पांच सूत्रीय संयुक्त पहल भी की है। चीन खुद को जिम्मेदार मानते हुए इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने का योगदान जारी रखेगा।

ट्रंप का ऐलान और ईरान का जवाब

ट्रंप ने सीजफायर को रणनीतिक कदम बताते हुए कहा कि यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों से जुड़ा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, अगर अमेरिका हमले रोकता है तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा। ईरान ने इस दौरान होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की संभावना जताई।

सीजफायर से तेल की कीमतों में भारी गिरावट

इस सीजफायर से तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका टल गया। मध्य पूर्व में तनाव कम होने से लेबनान, इराक समेत अन्य इलाकों में भी राहत महसूस की जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन की आर्थिक और कूटनीतिक पहुंच ने ईरान को समझौते के लिए राजी करने में निर्णायक भूमिका निभाई। पाकिस्तान की कोशिशें सराहनीय रही हों, लेकिन ट्रंप का बयान और चीनी विदेश मंत्रालय की पुष्टि साफ दर्शाती है कि बीजिंग की बैक-चैनल डिप्लोमेसी ने इस जंग को रोकने में असली काम किया।