
पाकिस्तान में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी (AI Image)
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। इसका सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगा है, जहां तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के चलते आर्थिक हालात और अधिक बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा सैलरी में कटौती और खर्चों पर नियंत्रण के बाद अब पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स बढ़ोतरी ने आम जनता और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है।
पाकिस्तान अपनी कुल पेट्रोलियम जरूरतों का लगभग 70% आयात मध्य पूर्वी देशों से करता है। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से तेल और गैस की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई टैंकर रास्ते में ही फंसे हुए हैं, जिससे देश में ईंधन संकट गहराने लगा है।
पाकिस्तान के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार नहीं है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब केवल कुछ ही दिनों का ईंधन स्टॉक बचा है-
यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं होती, तो देश में ऊर्जा आपातकाल जैसी स्थिति बन सकती है।
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए हाई-ऑक्टेन ईंधन पर टैक्स को 100 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यह टैक्स मुख्य रूप से लग्जरी वाहनों में उपयोग होने वाले ईंधन पर लगाया गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी गई।
सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में उछाल देखने को मिला है।
हालांकि, सरकार का दावा है कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन पर नहीं पड़ेगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर एविएशन सेक्टर पर भी पड़ा है। घरेलू उड़ानों के किराए में 2,800 से 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यह वृद्धि 10,000 से 28,000 रुपये तक पहुंच गई है। विशेष रूप से मध्य पूर्व और मध्य एशिया के रूट्स पर किराए में अधिक उछाल देखा गया है।
Updated on:
23 Mar 2026 11:10 am
Published on:
23 Mar 2026 09:51 am
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