Iran Israel Tension: ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव कम होने का नाम नहीं रहा है। गुरुवार को ईरान ने इजराइल के कई इलाकों में क्लस्टर बमों से हमला किया है। आइए आसान सवालों से क्लस्टर बम और इसके घातक प्रभावों को समझते है।
What is Cluster Bomb: ईरान और इजराइल की जंग दिन पर दिन भीषण होती जा रही है। दोनों देश एक के बाद एक हमले कर निशाना बना रहे है। इसी बीच 19 जून को ईरान ने इजराइल के कई इलाकों पर क्लस्टर बमों से हमला किया है। इन बमों के इस्तेमाल ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह नागरिकों के लिए बेहद खतरनाक माने जाते है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने पुष्टि करते हुए बताया है कि हमलों के दौरान कम से कम एक प्रोजेक्टाइल में क्लस्टर बम का इस्तेमाल हुआ है। खबरों के अनुसार, दोनों देशों में चल रही जंग के दौरान पहली बार इन बमों का इस्तेमाल किया गया है।
आइए आसान सवालों से समझते है कि आखिर यह क्लस्टर बम क्या है और क्यों इसके इस्तेमाल ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है।
यह एक ऐसा हथियार है जो किसी इलाके में जाकर सबम्यूनिशन्स यानी छोटे छोटे बम छोड़ देता है। यह बम एक बार में फटने की बजाय हवा में खुल कर कई दूरी तक फैल जाते है और फिर जमीन पर गिरकर फटते है। इजराइली सेना के अनुसार, ईरानी हमले में मिसाइल का वारहेड जमीन से लगभग सात किलोमीटर ऊपर फटा। जिसके चलते मध्य इजरायल में आठ किलोमीटर के इलाके में 20 सबम्यूनिशन्स गिरे।
इस बम के बिना फटे विस्फोटकों को पीछे छोड़ने के चलते इसे लेकर विवाद होता है। इसमें से कई सबम्यूनिशन्स गिरने पर नहीं फटते है और सालों तक सक्रिय रहते है, जिससे अनजाने में इसके पास आने वाले व्यक्तियों को गंभीर खतरा हो सकता है।
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल से निकला एक बम मध्य इजरायली शहर अजोर में एक घर पर गिरा था। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई। बाद में इजरायली होम फ्रंट कमांड ने एक सार्वजनिक सुरक्षा सलाह जारी करते हुए लोगों को सतर्क और सुरक्षित रहने की चेतावनी दी और इस तरह की कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर पुलिस को सूचना देने की सलाह दी।
एक साधारण मिसाइल एक केंद्रित स्थान पर विस्फोट करती है जबकि क्लस्टर बमों को व्यापक क्षेत्र में फैला देता है। इस तरह के बम व्यापक आबादी वाले क्षेत्रों में खतरे को अधिक बढ़ा देते है।
इन बमों पर साल 2008 में एक अंतरराष्ट्रीय संधि बनाई गई है जो इनके उपयोग, भंडारण, हस्तांतरण और उत्पादन पर प्रतिबंध लगाती है। कुल 111 देशों और 12 अन्य संस्थाओं ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन ईरान, इजराइल और अमेरिका सहित प्रमुख सैन्य शक्तियों ने इस संधि में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन बमों का इस्तेमाल किया गया था। इसमें जर्मनी ने SD-2 बटरफ्लाई बम, सोवियत संघ ने कुर्स्क में जर्मन बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ हवाई क्लस्टर बम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने M41 क्लस्टर बमों का उपयोग किया था। इसके अलावा 1960 से 1970 तक चले शीत युद्ध और 1980 से 1990 के दशक में भी इन बमों का इस्तेमाल किया गया है।
21वीं सदी के दौरान भी कई बार इन बमों का इस्तेमाल हो चुका है। साल 2001 से 2002 के बीच अमेरिका ने अफगानिस्तान पर 1,228 क्लस्टर बम गिराए थे। इसके अलावा इराक युद्ध के दौरान अमेरिका और यूके ने तीन सप्ताह के युद्ध में लगभग 13,000 क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया था। साथ ही लेबनान युद्ध में भी इजरायल ने क्लस्टर बमों का उपयोग किया था। 2015 से 2018 के बीच चले युद्ध के दौरान सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने भी यमन में 23 से अधिक क्लस्टर बम गिराए थे।