
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज। (फोटो: AI)
Middle East Tension: मध्य पूर्व में एक बार फिर से युद्ध का तनाव (Middle East Tension) काफी तेज हो गया है। ईरान (Iran) ने खुले तौर पर अमेरिका (United States) और इजराइल (Israel) को नई समस्याओं का जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का कहना है कि इन दोनों देशों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार (Global Shipping) में भारी रुकावट आ रही है। व्यापारिक जहाजों (Cargo Ships) को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है। इस तनाव को देखते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निगरानी बढ़ा दी गई है। यहां ईरानी सेना (Military Forces) ने कड़ा पहरा लगा दिया है। इस पूरे मुद्दे पर ईरान के विदेश मंत्री (Foreign Minister) अब्बास अरागची ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के साथ एक बहुत ही अहम बातचीत की है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्था (Global Economy) इस नए समुद्री संकट से पूरी तरह से सहम गई है।
ईरान के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच हाल ही में बातचीत हुई है। ईरान ने साफ कहा है कि गाजा और लेबनान में इजराइल के हमले और अमेरिका का दखल क्षेत्रीय शांति को बर्बाद कर रहा है। जब तक ये हमले नहीं रुकेंगे, समुद्र में व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित आना-जाना संभव नहीं हो पाएगा।
ईरान के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल जानबूझ कर ऐसा माहौल बना रहे हैं जिससे तनाव बढ़े। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से मालवाहक जहाज अब सीधा रास्ता छोड़ कर अफ्रीका का लंबा चक्कर लगा रहे हैं। इससे सामान पहुंचने में समय ज्यादा लग रहा है और महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है।
हॉर्मुज का रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे जरूरी है। दुनिया का करीब 30 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। ईरान की सेना यहां इसलिए कड़ा पहरा दे रही है ताकि वह अमेरिका को यह संदेश दे सके कि अगर उसके हितों पर आंच आई, तो वह इस महत्वपूर्ण रास्ते को पूरी तरह बंद कर सकता है। यह ईरान का अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक बड़ा तरीका है।
इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज का रास्ता कुछ दिनों के लिए भी बंद हुआ, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे। अमेरिका ने ईरान के इस कदम को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी देशों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अब यूएन की सुरक्षा परिषद इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर एक आपातकालीन बैठक बुलाने पर विचार कर रही है ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाया जा सके।
इस समुद्री खींचतान का सीधा असर भारत जैसे विकासशील देशों पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते से आने वाले कच्चे तेल पर बहुत हद तक निर्भर है। इंश्योरेंस महंगा होने से भारत में भी आयातित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
Updated on:
17 Mar 2026 05:41 pm
Published on:
17 Mar 2026 05:38 pm
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