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JAPAN TSUNAMI : दस साल पहले सुनामी से दहल गया था जापान, आज भी हरे हैं जख्म

-जापान के प्रशांत तटीय क्षेत्र तोहोकू में हुआ था भारी विनाश-18 हजार लोग मारे गए थे सुनामी में, एक लाख से अधिक विस्थापित हुए

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JAPAN TSUNAMI : दस साल पहले सुनामी से दहल गया था जापान

सुनामी की लहरों में जहाज और गाडिय़ां ताश के पत्तों की तरह बह गए।

टोक्यो. जापान में दस वर्ष पहले आज ही के दिन दुनिया की सबसे प्रलंयकारी सुनामी आई थी। 11 मार्च 2011 को रिक्टर स्केल पर 9 तीव्रता के भूकंप के बाद प्रशांत तटीय क्षेत्रों के करीब 20 देशों ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी थी। जापान ने तटीय इलाकों को खाली करवा लिया, लेकिन इस विनाश की किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। भूकंप के बाद समुद्र में 5 से 10 मीटर ऊंची लहरें रौद्र रूप लेती जा रही थी। जापान के तटीय उत्तर- पूर्वी होंशू के तोहोकू क्षेत्र में दस किलोमीटर अंदर तक लहरों ने सबकुछ तबाह कर दिया। समुद्र में बड़े-बड़े जहाज खिलौनों की तरह तैरते हुए दिखे। सडक़ें, रेलवे टै्रक बह गए। न्यूज चैनल्स पर पूरी दुनिया प्रकृति के इस रौद्र रूप को देख रही थी। पूर्वोत्तर जापान के 44 लाख घरों में बिजली गुल हो गई और 14 लाख घरों में पानी की आपूर्ति ठप हो गई। इस हादसे में 18 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी।

नुकसान से ज्यादा राहत और पुनर्वास पर खर्च
जानकारी के मुताबिक सुनामी के हादसे में जापान को 25 खरब येन का नुकसान हुआ था। जबकि इस क्षेत्र को फिर से पटरी पर लाने में 31.3 खरब येन खर्च हो चुके हैं। ये राशि मिस्र की पूरी इकोनॉकी के बराबर है। अगले पांच वर्ष में 16 खरब येन और खर्च प्रस्तावित है। हालांकि इसे जापान और वहां के लोगों की जीवटता ही कही जाएगी कि कुछ वर्ष बाद भी सब सामान्य नजर आने लगा।

फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में विस्फोट, आज भी खतरा
इस हादसे में जान माल के अलावा एक नुकसान और गंभीर था, भूकंप के 24 घंटे बाद फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में विस्फोट होने के बाद रेडियोधर्मी विकिरण फैलने की आशंका बढ़ रही थी। सरकार ने आसपास के इलाकों को खाली करवा लिया और इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई। 20 किलोमीटर के दायरे में करीब एक लाख लोगों को विस्थापित करना पड़ा। संयंत्र से निकले विकिरण को अभी भी जांचा जा रहा है। टोक्यो पावर इलेक्ट्रक पावर कंपनी के मुताबिक संयंत्र को पूरी तरह बंद होने में अभी 30 से 40 वर्ष और लगेंगे। हादसे के वक्त जापान में दो परमाणु संयंत्र निर्माणाधीन थे, जबकि 54 चालू संयंत्रों से देश को 30 फीसदी बिजली आपूर्ति हो रही थी।