
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एशले राइली प्राइमरी स्कूलिंग खत्म कर 16 साल की उम्र में डॉक्टरों के पास पहुंची थी। परेशानी यह थी कि उसकी कई सहेलियां मासिक धर्म में प्रवेश कर चुकी थीं, लेकिन उसे ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ। अल्ट्रासाउंड में डॉक्टरों ने पाया कि उसके शरीर में गर्भाशय नहीं था। उसकी वैजाइनल कैनाल भी छोटी हो गई थी। डॉक्टरों के मुताबिक वह मेयर रोकिटांस्की कुस्टर हाउसर (एमआरकेएच) सिंड्रोम से पीडि़त थी। यह विकार महिला प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करता है। गर्भाशय अविकसित या अनुपस्थित रहता है। हालांंकि बाहरी जननांग सामान्य होते हैं, लेकिन गर्भाशय नहीं होने से मासिक धर्म नहीं होता।
पांच साल तक हार्मोन की दवाओं के बाद एशले राइली के शरीर में गर्भाशय विकसित हो गया। उसने ऑस्ट्रेलियाई न्यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा, मुझे नहीं मालूम था कि मैं देर से विकसित होने वाली लडक़ी थी। कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स से कंसल्ट करना पड़ा। कई ब्लड टेस्ट, एमआरआइ और स्कैन हुए। आखिरकार इंटरनल अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय विकसित होता नजर आया।
एशली का इलाज करने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि उसकी हड्डियों का घनत्व और आकार 14 साल की बच्ची जैसा था। पिट्यूटरी (पीयूष) ग्रंथि में समस्या के कारण अंडाशय में बहुत कम सेक्स हॉरमोन बनते थे। आम तौर पर एस्ट्रोजन की दवा लेने से गर्भाशय बढ़ाने में कामयाबी नहीं मिलती। अगर एशले का गर्भाशय बढ़ता रहा तो उसके भविष्य में गर्भवती होने की संभावना है।
Published on:
17 Sept 2024 08:59 am
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