
कराची शॉपिंग मॉल हादसा। ( फोटो: AI Generated)
Standards: पाकिस्तान के कराची में गुल प्लाजा (Gul Plaza) शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 61 हो गई है। यहां मॉल (Karachi Mall Fire Update) में 30 शव मिले हैं। इससे सबक लेने की जरूरत है। भारत में शॉपिंग मॉल्स के लिए सुरक्षा और सुविधाओं के मानक मुख्य रूप से 'नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया' (National Building Code) और संबंधित राज्यों के 'फायर सर्विस नियमों' द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। यहां भारत में शॉपिंग मॉल्स की सुरक्षा और (Shopping Mall Safety Rules) सुविधा के प्रमुख मानक बिंदु दिए गए हैं:
भारत में किसी भी कमर्शियल मॉल के लिए सबसे सख्त नियम अग्नि सुरक्षा के होते हैं। कराची जैसी घटनाओं से बचने के लिए भारत में निम्नलिखित व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं:
मॉल की हर दुकान और कॉमन एरिया में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम और धुएं की पहचान करने वाले सेंसर्स का होना अनिवार्य है।
एनबीसी (NBC) के अनुसार, मॉल में पर्याप्त संख्या में आपातकालीन दरवाजे होने चाहिए। ये दरवाजे 'पुश-बार' सिस्टम वाले होने चाहिए जिन्हें आसानी से धक्का देकर खोला जा सके और ये कभी भी लॉक नहीं होने चाहिए।
आग लगने की स्थिति में साधारण लिफ्ट बंद कर दी जाती है, इसलिए फायर फाइटर्स के लिए अलग से 'फायर लिफ्ट' और हर फ्लोर पर 'फायर हाइड्रेंट' (पानी के पाइप का कनेक्शन) होना जरूरी है।
मॉल में आग लगने का सबसे बड़ा कारण शॉर्ट-सर्किट होता है। सुरक्षा मानकों के अनुसार:
नियमित ऑडिट: मॉल प्रबंधन को हर साल एक 'इलेक्ट्रिकल ऑडिट' कराना होता है ताकि जर्जर तारों या ओवरलोडिंग की जांच हो सके।
मॉल के निर्माण और सजावट में ऐसी सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए जो आग न पकड़े (जैसे फायर-रिटार्डेंट पेंट और ग्लास)।
वेंटिलेशन सिस्टम: आग लगने पर दम घुटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए 'मैकेनिकल वेंटिलेशन' अनिवार्य है, जो धुएं को तुरंत बाहर खींच सके।
सुरक्षा केवल आग से ही नहीं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों और भगदड़ से भी जुड़ी है:
CCTV और कमांड सेंटर: मॉल के हर कोने की 24/7 निगरानी के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरों का जाल और एक सेंट्रल कमांड रूम होना चाहिए।
मेटल डिटेक्टर और स्कैनिंग: प्रवेश द्वारों पर डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) और हैंड-हेल्ड स्कैनर्स के साथ गार्ड्स की तैनाती सुरक्षा का प्राथमिक मानक है।
ऑक्युपेंसी लिमिट: हर मॉल की एक क्षमता तय होती है। सुरक्षा मानकों के अनुसार, मॉल के कॉमन एरिया में प्रति व्यक्ति न्यूनतम स्थान सुनिश्चित होना चाहिए ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
सुविधाओं के मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक के लिए मॉल का अनुभव सुरक्षित और सुगम हो:
नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत मॉल्स में रैंप, विशेष लिफ्ट और दिव्यांगों के लिए अनुकूल शौचालयों का होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
बड़े मॉल्स में एक 'इमरजेंसी मेडिकल रूम' और प्राथमिक चिकित्सा किट के साथ प्रशिक्षित स्टाफ होना चाहिए।
मॉल के भीतर रास्तों, शौचालयों, लिफ्ट और निकास द्वारों के स्पष्ट बोर्ड (हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में) लगे होने चाहिए जो अंधेरे में भी चमकें (Glow-in-the-dark)।
बहरहाल, भारत में नियम काफी व्यापक और कड़े हैं, लेकिन चुनौती इनके 'कार्यान्वयन' (Implementation) में है। अक्सर छोटे शहरों के मॉल्स या पुराने कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में फायर एग्जिट को स्टोर रूम बना दिया जाता है या फायर अलार्म खराब पड़े होते हैं। कराची हादसा एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की कीमत निर्दोष लोगों की जान देकर चुकानी पड़ती है। प्रशासन को समय-समय पर 'मॉक ड्रिल' और औचक निरीक्षण सुनिश्चित करना चाहिए।
Updated on:
22 Jan 2026 01:27 pm
Published on:
22 Jan 2026 01:22 pm
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