
लेबनान में इजरायल का हमला। (सांकेतिक फोटो: AI)
Escalation : मध्य पूर्व में एक बार फिर भयंकर युद्ध भड़क उठा है। इजरायल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाते हुए जमीनी घुसपैठ (Escalation) शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इस कदम के तुरंत बाद, ईरान ने फिलिस्तीन में इजरायल के कब्जे वाले इलाकों और इजरायली सैन्य ठिकानों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों से जोरदार हमला (Iran Missile Attack) किया है। इस अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं से डरा दिया है। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) का दावा है कि उनके सैनिक लेबनान सीमा (Israel Lebanon War) के भीतर 'सीमित और सटीक' ऑपरेशन चला रहे (Iran Missile Attack) हैं। वहीं, ईरानी राज्य मीडिया की रिपोर्ट्स पुष्टि करती हैं कि ईरान ने इजरायल के अहम एयरबेस और सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया(Middle East Crisis) है।
अमेरिका ने इस हमले को लेकर ईरान की कड़ी निंदा की है और इजरायल को रक्षा के लिए पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड्स का कहना है कि यह हमला उनके प्रमुख नेताओं की हत्या का सीधा प्रतिशोध है। इस भड़कते युद्ध के बीच, भारत में ईरान के राजदूत रूवेन अज़ार (Reuven Azar) ने एक बेहद अहम और कूटनीतिक बयान दिया है। नई दिल्ली में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी इस युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहता था। राजदूत ने कहा, "हम तो बातचीत की टेबल पर बैठे थे और गाजा में युद्धविराम का इंतजार कर रहे थे। लेकिन इजरायल ने हमारी संप्रभुता का उल्लंघन कर सभी लाल रेखाएं (Red lines) पार कर दीं।" भारतीय कूटनीतिक हलकों में इस बयान को ईरान की तरफ से दुनिया को अपना पक्ष समझाने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं तेजी से आ रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और इजरायल के प्रधानमंत्री ने ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ, क्षेत्रीय गुटों ने ईरानी हमले का समर्थन किया है। भारत सरकार (Iranian Ambassador India) ने इस बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से तुरंत संयम बरतने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की है। इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल ने ईरान के ठिकानों (संभवतः तेल रिफाइनरियों या परमाणु सुविधाओं) पर एक बड़े जवाबी हमले की रूपरेखा तैयार कर ली है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इस संकट पर चर्चा के लिए आपातकालीन बैठकें कर रही है। इस युद्ध के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक उछाल आ गया है।
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Updated on:
05 Mar 2026 03:46 pm
Published on:
05 Mar 2026 03:44 pm
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