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ईरान ने जिस F-15E विमान को गिराया, क्या उसका मलबा अमेरिका को वापस देना जरूरी? क्या कहता है नियम?

US Aircraft Crash: ईरान-इजरायल में चल रहे युद्ध में अमेरिका के कई विमान मारे गए हैं। आइए जानते हैं उन विमानों के मलबे पर किसका अधिकार होगा।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 10, 2026

ईरान वॉर (AI Image)

Iran-Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एक नया और अहम मोड़ ले लिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के युद्धविराम की घोषणा करते हुए दावा किया है कि यह फैसला उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल से बातचीत के बाद लिया है। इस बीच, संघर्ष से जुड़ी कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं, जिनमें अमेरिका को हुए नुकसान और ईरान के दावों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसी घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है, अगर किसी देश का सैन्य विमान दूसरे देश में गिरता है, तो उसके मलबे पर आखिर किसका अधिकार होता है?

किसके पास रहता है मालिकाना हक?

अंतरराष्ट्रीय कानून इस सवाल का अपेक्षाकृत स्पष्ट जवाब देता है। किसी भी सैन्य विमान को उस देश की संप्रभु संपत्ति माना जाता है, जिससे वह संबंधित होता है। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई अमेरिकी सैन्य विमान ईरान की सीमा के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो जाए या उसे मार गिराया जाए, तब भी उसका कानूनी मालिकाना हक अमेरिका के पास ही रहेगा। हालांकि, जिस देश की जमीन पर वह मलबा गिरता है, वह उस पर भौतिक नियंत्रण रख सकता है। यहीं पर ‘कब्जा’ और ‘मालिकाना हक’ के बीच का अंतर समझना जरूरी हो जाता है, क्योंकि दोनों एक जैसे नहीं होते।

क्या है सॉवरेन इम्यूनिटी?

इस पूरे मामले को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण सिद्धांत ‘सॉवरेन इम्यूनिटी’ है। यह सिद्धांत कहता है कि किसी देश की सरकारी संपत्ति, जैसे सैन्य विमान या युद्धपोत, को बिना उसकी अनुमति के कोई दूसरा देश न तो जब्त कर सकता है और न ही उसकी आधिकारिक जांच कर सकता है। यानी, अगर कोई अमेरिकी विमान ईरान में गिरता है, तो ईरान के पास उस मलबे पर नियंत्रण भले ही हो, लेकिन वह बिना अमेरिका की सहमति के उस पर अधिकार नहीं जता सकता या उसका उपयोग नहीं कर सकता।

क्या मलबा वापस लौटाया जाता है?

कागजों पर अंतरराष्ट्रीय कानून यह जरूर कहता है कि सैन्य उपकरण के मलबे को उसके मूल देश को लौटा दिया जाना चाहिए, लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। युद्ध या तनाव के माहौल में देश अक्सर रणनीतिक कारणों से ऐसे मलबे को अपने पास ही रख लेते हैं। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य उस तकनीक का अध्ययन करना या उससे जुड़ी खुफिया जानकारी हासिल करना होता है, जो भविष्य में सैन्य दृष्टि से बेहद अहम साबित हो सकती है।

नुकसान और मुआवजे का क्या नियम है?

इस मुद्दे का एक और महत्वपूर्ण पहलू नुकसान और मुआवजा है। यदि किसी गिरते हुए विमान के मलबे से आम नागरिकों या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय ढांचे जैसे शिकागो कन्वेंशन के तहत विमान संचालित करने वाले देश को मुआवजा देना पड़ सकता है। हालांकि, जब मामला युद्ध या सैन्य संघर्ष का हो, तो इन नियमों को लागू करना काफी जटिल हो जाता है, क्योंकि उस स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान नहीं होता।