
Nepal PM Balendra Shah
नेपाल की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Balendra Shah ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही तेज और सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही उनकी सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है, जिससे देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बनने के दूसरे ही दिन नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देश के तीन प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्रियों Sher Bahadur Deuba, K. P. Sharma Oli और Pushpa Kamal Dahal के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सघन जांच शुरू कर दी है। यह कदम नेपाल की राजनीति में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि नई सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगी।
इसी क्रम में काठमांडू जिला अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इसके अलावा पूर्व मंत्री Deepak Khadka को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इन कार्रवाइयों से साफ है कि सरकार उच्च स्तर के नेताओं को भी कानून के दायरे में लाने के लिए गंभीर है।
वहीं दूसरी ओर नई सरकार में शामिल चेहरों में भी खास चर्चा हो रही है। नेपाल की नई स्वास्थ्य मंत्री Nisha Mehta का भारत से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने All India Institute of Medical Sciences (एम्स, दिल्ली) से नर्सिंग में स्नातक की पढ़ाई (2006-2010) पूरी की है। इसके बाद उन्होंने ग्वालियर यूनिवर्सिटी से परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। 38 वर्षीय निशा मेहता के पति डॉ. सरोज सिंह कोशी प्रांतीय पुलिस अस्पताल के प्रमुख हैं, जो उनके प्रोफेशनल और सामाजिक नेटवर्क को और मजबूत बनाता है।
शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने अपने 100 दिन के एक्शन प्लान के तहत स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सक्रिय राजनीतिक छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि शिक्षा संस्थानों को राजनीति से मुक्त रखकर छात्रों को बेहतर वातावरण दिया जा सकता है। इसके साथ ही छात्रों की समस्याओं को सीधे सुनने और समाधान के लिए 90 दिनों के भीतर “स्टूडेंट काउंसिल” या “वॉइस ऑफ स्टूडेंट” जैसे गैर-राजनीतिक मंच विकसित किए जाएंगे। यह कदम छात्रों को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष आवाज देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार ने एक और अहम फैसला लेते हुए नेपाल में संचालित विदेशी नामों वाले शिक्षण संस्थानों, जैसे ऑक्सफोर्ड, पेंटागन और सेंट जेवियर्स के नाम बदलकर उन्हें मौलिक नेपाली पहचान देने की बात कही है। इस कदम को सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और शिक्षा प्रणाली को स्थानीय संदर्भ से जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
Published on:
30 Mar 2026 03:36 am
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