
पाकिस्तान खुद को फाइटर जेट्स का एक्सपोर्टर बनाना चाहता है: रिपोर्ट में बड़ा खुलासा (सोर्स: AI जनरेटेड इमेज)
Pakistan Economy Crisis: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की तस्वीर इन दिनों काफी विरोधाभासी नजर आ रही है। एक तरफ देश में महंगाई, बेरोजगारी, ऊर्जा संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी से आम जनता परेशान है, तो दूसरी ओर सरकार बड़े-बड़े रक्षा सपनों में उलझी दिखाई देती है। हाल ही में उसने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच समझौता कराने की पहल की, जिसमें पाक के विदेश मंत्री इशाक डार रेड कार्पेट पर धड़ाम से गिर गए। जिसके बाद सोशल मीडिया पर खूब मीम वायरल हुए। खैर….
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद पाकिस्तान खुद को फाइटर जेट्स का बड़ा एक्सपोर्टर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब देश के सामने रोटी, रोजगार, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बुनियादी चुनौतियां खड़ी हों, तब प्राथमिकता आम लोगों की जरूरतें होनी चाहिए। लेकिन इसके उलट, रक्षा निर्यात पर जोर देना कई सवाल खड़े करता है।
बता दें 2025 में पाकिस्तान ने करीब 10 बिलियन डॉलर के हथियारों के एक्सपोर्ट डील साइन किए। इन डील्स में चीन के साथ मिलकर बनाए गए JF-17 Thunder फाइटर जेट और 'MFI-17 Mushshak' ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल हैं। पाकिस्तान खुद को अफ्रीका, यूरोप और खाड़ी देशों के लिए एक नए हथियार सप्लायर के तौर पर पेश करना चाहता है, लेकिन उसके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन जेट्स की बिक्री को कर्ज और International Monetary Fund से मिलने वाले बेलआउट का हल बता रही है। लेकिन असलियत यह है कि JF-17 जैसे जेट बनाना काफी महंगा पड़ता है। इसके कई जरूरी पार्ट्स चीन, रूस और ब्रिटेन से मंगाने पड़ते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।
इसके अलावा, पाकिस्तान लीबिया जैसे जोखिम वाले देशों से भी डील कर रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां लागू हैं। ऐसे में इन डील्स को लागू करना भी मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि पाकिस्तान अपनी आर्थिक समस्याओं को सैन्य खर्च बढ़ाकर हल करने की कोशिश कर रहा है, जो पहले भी सफल नहीं रही। 2025 के बजट में जहां कुल खर्च घटाया गया, वहीं डिफेंस बजट में 20% की बढ़ोतरी की गई, जो आर्थिक रूप से भी गलत और आम लोगों के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है।
दरअसल, दुनिया में फाइटर जेट बेचकर बड़ा हथियार सप्लायर बनने की पाकिस्तान की योजना सुनने में भले बड़ी लगे, लेकिन इसके साथ कई गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हैं। जेट बेचने से आत्मनिर्भर बनने की बात तो की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि इन जेट्स को बनाने में विदेशों से महंगे पार्ट्स मंगाने पड़ते हैं, जिससे देश का पैसा बाहर जाता है। ऐसे में आम लोगों को इसका सीधा फायदा बहुत कम मिलता है।
विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि पाकिस्तान को अपनी असली समस्याओं…जैसे गरीबी, शिक्षा, रोजगार और कमजोर संस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन सरकार का फोकस इन बुनियादी मुद्दों पर कम नजर आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है…महंगाई ज्यादा है, कर्ज बढ़ा हुआ है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से खतरा बना रहता है। ऊपर से, आर्थिक फैसले पूरी तरह बाजार के हिसाब से नहीं, बल्कि राजनीति और खास लोगों के प्रभाव में लिए जाते हैं।
ऐसे में सबसे बड़ी बात यह है कि जब देश ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और रोजगार जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब सरकार फाइटर जेट एक्सपोर्ट पर दांव लगा रही है। JF-17 Thunder जैसे जेट भी पूरी तरह घरेलू नहीं हैं, क्योंकि इनके कई पार्ट्स विदेश से आते हैं। इससे कमाई कम होती है और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। कुल मिलाकर, कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद डिफेंस सेक्टर पर ज्यादा भरोसा करना जोखिम भरा कदम माना जा रहा है।
Updated on:
29 Mar 2026 09:55 pm
Published on:
29 Mar 2026 09:54 pm
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