17 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Dragon को खुली चेतावनी: ‘ताइवान नहीं है यूक्रेन, हमला हुआ तो लाशें नहीं उठा पाएगा चीन!’

Trump Beijing visit:जेएनयू के चीनी मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने चेतावनी दी है कि ताइवान पर हमला चीन के लिए विनाशकारी होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बीजिंग यात्रा के बाद वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं।

3 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

May 17, 2026

Professor Srikanth Kondapalli

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में चीनी अध्ययन के विशेषज्ञ प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली। ( फोटो: ANI)

Geopolitics: भू राजनीति के जानकारों का मानना है कि ताइवान को कमजोर आंकना बीजिंग की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में चीनी अध्ययन के विशेषज्ञ प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने ताइपे की मजबूत रक्षा प्रणाली पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि यूक्रेन की तुलना में ताइवान सैन्य रूप से कहीं ज्यादा सक्षम है। अगर चीन ताइवान जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की सैन्य घुसपैठ की कोशिश करता है, तो चीनी सेना को भीषण नुकसान झेलना पड़ेगा। प्रोफेसर कोंडापल्ली के अनुसार, इस युद्ध में कम से कम एक लाख चीनी सैनिकों की जान जा सकती है, जो चीन के वैश्विक महाशक्ति बनने के सपने को हमेशा के लिए तोड़ देगा।

ट्रंप की बीजिंग यात्रा: दिखावा ज्यादा, नतीजा शून्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 13 से 15 मई के बीच चीन का राजकीय दौरा किया था। जेएनयू प्रोफेसर ने इस दौरे का विश्लेषण करते हुए कहा कि ताइवान के पास ऐसे हाई-टेक सैन्य हथियार हैं, जो चीन के मुख्य भूभाग के अंदर तक तबाही मचा सकते हैं। इसके अलावा, चीन का करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार इसी ताइवान जलडमरूमध्य से होता है, जो युद्ध की स्थिति में पूरी तरह तबाह हो जाएगा। ट्रंप की इस यात्रा में रोज गार्डन की सैर और भव्य दावतों का दिखावा तो खूब हुआ, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति खाली हाथ वापस लौटे। एलन मस्क, टिम कुक और जेन्सेन हुआंग जैसे 30 बड़े टेक दिग्गजों के शामिल होने के बावजूद कोई बड़ा निवेश समझौता नहीं हो सका। यहां तक कि एनवीडिया की H200 एआई चिप्स की चीन को बिक्री पर भी कोई सहमति नहीं बन पाई, जिससे टेक जगत को बड़ी निराशा हुई है।

मिडिल ईस्ट संकट और यूरेनियम की गुप्त वार्ता

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच महाशक्तियों के बीच कुछ अहम रणनीतिक वादे हुए हैं। ट्रंप के दावों के मुताबिक, चीन ने आश्वासन दिया है कि वह परमाणु मुद्दे पर ईरान का समर्थन नहीं करेगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के विसैन्यीकरण पर भी चर्चा हुई है। पर्दे के पीछे वैश्विक शक्तियों के बीच करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित रूप से रूस या चीन में शिफ्ट करने की गुप्त बातचीत चल रही है। यह चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ईरान अब न केवल कच्चे तेल के जहाजों बल्कि समुद्र के नीचे बिछी 'सबमरीन केबल' को भी निशाना बना रहा है, जिससे वैश्विक डेटा सुरक्षा खतरे में है।

भारत के लिए बढ़ा खतरा और चीन की दोहरी नीति

इस पूरे घटनाक्रम का भारत पर भी गहरा असर पड़ने वाला है। प्रोफेसर कोंडापल्ली ने सचेत किया है कि अमेरिका और चीन के बीच बन रही नई व्यवस्था भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह स्थिति अतीत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अमेरिका-पाकिस्तान और चीन-पाकिस्तान के बीच देखे गए खतरनाक तालमेल जैसी हो सकती है। उन्होंने चीन के कूटनीतिक दोहरेपन को उजागर करते हुए कहा कि शी जिनपिंग ने पीएम मोदी से 'साझेदार हैं, प्रतिद्वंदी नहीं' का जो जुमला कहा था, वही उन्होंने ट्रंप के सामने भी दोहराया। भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी तरह की बयानबाजी के बाद गलवान घाटी की हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें हमने अपने 20 वीर सैनिकों को खो दिया था। इसलिए, नई दिल्ली को चीन की इस मीठी कूटनीति से बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

ताइवान चीन को सीधी टक्कर देने के लिए तैयार

इस खबर पर वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि प्रोफेसर कोंडापल्ली का यह आकलन बीजिंग के अति-आक्रामक रवैये को आईना दिखाता है। ताइवान की 'पोरक्यूपाइन स्ट्रेटजी' यानि खुद को एक कांटेदार चूहे की तरह मजबूत कर लेना, चीन को सीधी टक्कर देने के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका ताइवान को और अधिक उन्नत हथियारों की सप्लाई तेज करता है। साथ ही, ट्रंप की इस यात्रा के विफल होने के बाद क्या अमेरिका चीन पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे बढ़ेगा?

पूरी दुनिया में इंटरनेट ठप होने की आशंका

इस भू-राजनीतिक टकराव का एक आर्थिक पहलू सबमरीन केबल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जुड़ा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य या ताइवान में संघर्ष भड़कता है, तो पूरी दुनिया में इंटरनेट ठप होने और चिप शॉर्टेज का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, जिससे भारत का टेक सेक्टर भी अछूता नहीं रहेगा। (इनपुट: ANI)