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दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे लोग…पाकिस्तान में 11 साल में सबसे ज्यादा गरीबी, हालात हुए बदतर

Pakistan Poverty Rate: पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर कर रही है। 11 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। आलम ये है कि 29% लोग दो वक्त की रोटी के लिए टीआरएस रहे हैं।

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 22, 2026

Economic Crisis Pakistan

पाकिस्तान की एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे, हालात हुए बदतर (इमेज सोर्स: AI जनरेटेड चैट GPT)

Economic Crisis Pakistan: पाकिस्तान में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लाखों लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी जद्दोजहद कर रहे हैं। ताजा सर्वे के मुताबिक, देश में गरीबी 11 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और करीब 29% आबादी गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी काटने को मजबूर है। यह आंकड़ा बताता है कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट कितना गहरा गया है और आम लोगों के लिए हालात किस कदर मुश्किल होते जा रहे हैं।

जी हां, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 7 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन बिता रहे हैं। यह आंकड़ा 8,484 रुपये मासिक गरीबी रेखा पर आधारित है, जिसे बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूनतम आवश्यक राशि माना गया है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि 2018-19 के बाद से, जब पिछला सर्वेक्षण किया गया था, गरीबी में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

2019 में गरीबी दर 21.9 प्रत‍िशत थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदा सरकार के पहले साल में यह दर बढ़कर 28.9 प्रत‍िशत हो गई।

रिपोर्ट में दावा:

रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में गरीबी 2014 के बाद फिर से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इस बार गरीबी दर लगभग 29% है, जबकि 2014 में यह 29.5% थी। सिर्फ गरीबी ही नहीं, आय में असमानता भी बहुत तेजी से बढ़ी है। असमानता का स्तर अब 32.7 पर पहुंच गया है, जो पिछले 27 वर्षों में सबसे ज्यादा है। यह स्थिति 1998 के बाद पहली बार देखी जा रही है।

देश में बेरोजगारी भी 21 साल में सबसे ज्यादा, यानी 7.1% हो गई है। पाकिस्तान के योजना मंत्री का कहना है कि IMF के आर्थिक सुधार कार्यक्रम, सब्सिडी हटाने, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और महंगाई ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं और धीमी आर्थिक वृद्धि ने भी अधिक लोगों को गरीबी में धकेला है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 13 साल बाद पहली बार गरीबी घटने की बजाय बढ़ने लगी है।

ग्रामीण इलाकों में गरीबी 28.2% से बढ़कर 36.2% हो गई।

शहरी क्षेत्रों में यह 11% से बढ़कर 17.4% तक पहुंच गई।

सभी राज्यों में हालात बिगड़े हैं:

पंजाब: गरीबी 16.5% से बढ़कर 23.3%

सिंध: 24.5% से बढ़कर 32.6%

खैबर पख्तूनख्वा: 28.7% से बढ़कर 35.3%

बलूचिस्तान: सबसे खराब स्थिति- गरीबी 42% से बढ़कर 47% हो गई, यानी लगभग आधी आबादी गरीबी में जी रही है।

लोगों की औसत आमदनी में भी गिरावट

लोगों की औसत आमदनी भी घटी है। 2019 में जहां औसत सालाना आय 35,454 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर 31,127 रुपये रह गई है, यानी 12% की गिरावट। इसी दौरान घरेलू खर्च भी 5% कम हो गया। हालांकि आमदनी थोड़ा बढ़ी जरूर है, लेकिन तेज़ महंगाई के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता लगातार घटती जा रही है। इस वजह से आम आदमी की मुश्किलें पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।