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आतंकवाद की कीमत सिर्फ जानें नहीं, भारत की अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ा असर: रिपोर्ट

यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट में पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर और आतंकी नेटवर्क को समर्थन देने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में आतंकवाद के आर्थिक और सामाजिक असर का भी जिक्र है।
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भारत

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Anurag Animesh

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Oct 10, 2026

Pakistan Terrorism news

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर

Pakistan Terrorism Allegations: पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत को अस्थिर करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया गया है। यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों से जारी इस कथित छद्म युद्ध ने भारत पर सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भारी बोझ डाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी हमलों के कारण जान-माल का नुकसान होने के साथ देश की विकास प्राथमिकताओं और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को भारत के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया। इसके बावजूद भारत की संस्थाओं और लोगों की दृढ़ता ने देश को इन चुनौतियों का सामना करने में मदद की है।

पाकिस्तान की सेना और ISI पर आतंकी नेटवर्क को मदद देने का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना ने भारत को लंबे समय से सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए उग्रवादी नेटवर्क तैयार किए और उन्हें समर्थन दिया। इसमें दावा किया गया है कि इन नेटवर्कों को पनाह देने, प्रशिक्षण और रसद संबंधी मदद उपलब्ध कराने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की भूमिका रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआत में कश्मीरी युवाओं की भर्ती पर जोर दिया गया, लेकिन बाद में अफगानिस्तान में सोवियत युद्ध का अनुभव रखने वाले विदेशी लड़ाके भी इन नेटवर्कों का हिस्सा बने। इसमें आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान में मौजूद शिविरों में आतंकियों को हथियार चलाने, विस्फोटकों के इस्तेमाल और गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दी जाती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, घुसपैठियों को नियंत्रण रेखा (LoC) पार कराने में स्थानीय मार्गदर्शकों और इलाके की भौगोलिक जानकारी का इस्तेमाल किया जाता था। हथियारों, संचार उपकरणों और धन की आपूर्ति के लिए कथित तौर पर ISI के नेटवर्क, समर्थक दानदाताओं, नशीले पदार्थों की तस्करी और जबरन वसूली जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। ये सभी दावे रिपोर्ट में किए गए हैं।

संसद हमले से पहलगाम तक आतंकी घटनाओं का जिक्र

रिपोर्ट में भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है। इसमें 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले को भारतीय लोकतंत्र पर हमला बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को जिम्मेदार माना गया। इसके बाद 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलों की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। रिपोर्ट में 18 सितंबर 2016 के उरी हमले का भी जिक्र है, जिसमें 19 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक करने की घोषणा की थी। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी।

आतंकवाद का असर सिर्फ जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं

रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद की कीमत केवल हमलों में मारे गए लोगों या घायल हुए नागरिकों तक सीमित नहीं है। इससे प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सुरक्षा बलों की तैनाती, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और आतंकवाद से निपटने के लिए किए जाने वाले खर्च का भी देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों से जारी इस चुनौती ने भारत की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और संसाधनों के इस्तेमाल को भी प्रभावित किया है।