Pakistan Changes Policy For Afghanistan: पाकिस्तान और तालिबान के बीच सब कुछ सही नहीं चल रहा है। इसी के चलते पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने अफगानिस्तान के बारे में एक बड़ा फैसला लिया है। क्या है यह फैसला? आइए जानते हैं।
पिछले कुछ समय में पाकिस्तान और तालिबान के बीच सब कुछ सही नहीं चल रहा है। दोनों पक्षों के संबंधों में काफी खटास आ गई है। जब से अफगानिस्तान में तालिबान ने सत्ता पर कब्ज़ा जमाया है, तब से पाकिस्तान में आतंकी हमलों के मामले भी बढ़ गए हैं। इसी के चलते हाल ही में पाकिस्तान ने अवैध तरीके से देश में रह रहे 17 लाख अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दे दिया था और यह भी साफ कर दिया था कि जो ऐसा नहीं करेंगे उन्हें ज़बरदस्ती देश से निर्वासित कर दिया जाएगा। करीब 1.7 लाख अफगान शरणार्थी पाकिस्तान छोड़ चुके हैं और जिन्होंने ऐसा नहीं किया है उनकी गिरफ्तारियाँ शुरू हो चुकी हैं जिससे उन्हें निर्वासित किया जा सके। इससे भी दोनों देशों के संबंध काफी बिगड़ गए हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के बारे में एक और बड़ा फैसला लिया है।
पाकिस्तान अब नहीं करेगा तालिबानी शासन का समर्थन
पाकिस्तान ने अब साफ कर दिया है कि वो तालिबान के शासन का समर्थन नहीं करेगा। साथ ही पाकिस्तान को किसी भी तरह की मदद न देने का भी पाकिस्तान ने फैसला कर लिया है। इस बात की जानकारी पाकिस्तान के कार्यवाहक पीएम अनवर उल हक काकर ने दी है। काकर ने साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के लिए नीति को बदल रहा है और इसी के तहत ये फैसले लिए गए हैं।
क्यों लिया पाकिस्तान ने यह फैसला?
पाकिस्तान के इस फैसले के पीछे देश में बढ़ रहा आतंकवाद एक बड़ी बजह है। जब से तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्ज़ा किया है, तभी से पाकिस्तान में आतंकी हमलों के मामले बढ़ गए हैं। पाकिस्तान में होने वाले ज़्यादातर आतंकी हमलों के पीछे आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का हाथ रहता है। पाकिस्तान ने कई बार तालिबान सरकार से टीटीपी कर लगाम लगाने के लिए कहा है पर इसके बावजूद पाकिस्तान में टीटीपी की आतंकी गतिविधियाँ नहीं रुकी। खाकर में यह भी बताया है कि पाकिस्तान में अमेरिका में बने हथियारों को अवैध रूप से बेचा जा रहा है और उन हथियारों का इस्तेमाल टीटीपी देश में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहा है।
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