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बर्ड फ्लू फैलने से इस देश में दहशत; पोल्ट्री फार्म की सभी मुर्गियों को किया जाएगा दफन… WHO ने दी चेतावनी

Japan Bird Flu: जापान में बर्ड फ्लू न फैले… ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाना जरूरी है, इसलिए सभी मुर्गियों को खत्म करने का फैसला लिया गया है।

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 06, 2026

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जापान में एक बार फिर बर्ड फ्लू (इमेज सोर्स: ALO जापान एक्स स्क्रीनशॉट)

Japan Bird Flu WHO Warning: जापान में एक बार फिर बर्ड फ्लू (Bird Flu) ने चिंता बढ़ा दी है। देश के उत्तरी इलाके होक्काइडो के एक बड़े पोल्ट्री फार्म में एवियन इन्फ्लुएंजा फैलने की पुष्टि हुई है, जिससे प्रशासन और किसानों के बीच दहशत का माहौल बन गया है। अबिरा शहर में स्थित इस फार्म में करीब 1 लाख 90 हजार मुर्गियाँ पाली जाती हैं, जिन्हें संक्रमण फैलने से रोकने के लिए पूरी तरह से नष्ट कर दफन किया जाएगा।

मुर्गियों को नष्ट करने का फैसला

जापान के कृषि, वन और मत्स्य मंत्रालय के अनुसार, फार्म मालिक ने बुधवार को मुर्गियों में संदिग्ध लक्षण दिखने की जानकारी दी थी। उसी दिन किए गए त्वरित टेस्ट में वायरस की पुष्टि हुई और अगले दिन जेनेटिक जांच ने इसे पक्का कर दिया। यह मामला इस सीजन में जापान का 21वां और होक्काइडो क्षेत्र का चौथा मामला है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाना जरूरी है, इसलिए सभी मुर्गियों को खत्म करने का फैसला लिया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी चेतावनी

बता दें जापान में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) का खतरा आमतौर पर हर साल शरद ऋतु से लेकर अगले वसंत तक बना रहता है। इस दौरान ठंडे मौसम में वायरस के फैलने की संभावना ज्यादा होती है, इसलिए प्रशासन और पोल्ट्री फार्मों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एवियन इन्फ्लुएंजा एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ मामलों में यह स्तनधारियों और इंसानों तक भी पहुंच सकता है। हालांकि इंसानों में इसके मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।

एच5एन1 नाम का वायरस पहली बार 1996 में सामने आया था और तब से यह समय-समय पर पक्षियों में फैलता रहा है। साल 2020 के बाद इसका एक नया वेरिएंट अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कई देशों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री में बड़ी संख्या में मौतों का कारण बना। इसके बाद 2021 में यह उत्तर अमेरिका और 2022 में मध्य व दक्षिण अमेरिका तक फैल गया।

डब्ल्यूएचओ (WHO) का साफ कहना है कि इंसानों में संक्रमण आमतौर पर संक्रमित पक्षियों या उनके आसपास के वातावरण के संपर्क से होता है। यह वायरस इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन अगर संक्रमण हो जाए तो बीमारी गंभीर हो सकती है और मृत्यु दर भी काफी अधिक होती है। इसलिए विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हैं।