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ईरान के हमले से कतर की LNG इंडस्ट्री तबाह, 17% उत्पादन क्षमता ठप, वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा

Qatar LNG attack: ईरान के हमले से कतर की LNG क्षमता 17% तक प्रभावित हुई है। कतरएनर्जी के अनुसार इसका असर 5 साल तक रह सकता है, जिससे वैश्विक गैस सप्लाई और ऊर्जा बाजार पर संकट गहरा सकता है।

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भारत

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Rahul Yadav

Mar 19, 2026

Qatar LNG Attack

Qatar LNG Attack (Image: ChatGPT)

Qatar LNG Attack: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ नजर आने लगा है। ईरान के हमलों के बाद कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। कतरएनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के मुताबिक, हमलों की वजह से देश की करीब 17% LNG उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गैस सप्लाई पर संकट गहरा सकता है।

तीन से पांच साल तक रहेगा असर

कतरएनर्जी के अनुसार, हमले में LNG के दो बड़े प्लांट (ट्रेन) और एक गैस-टू-लिक्विड (GTL) सुविधा को नुकसान पहुंचा है। इससे करीब 1.28 करोड़ टन प्रति वर्ष उत्पादन ठप हो गया है।

कंपनी का कहना है कि इन इकाइयों को पूरी तरह बहाल होने में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है, जिससे लंबे समय तक सप्लाई प्रभावित रहने की आशंका है।

20 अरब डॉलर सालाना नुकसान का अनुमान

सीईओ साद अल-काबी ने बताया कि इस नुकसान से कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर का आर्थिक झटका लग सकता है।

उन्होंने इसे अभूतपूर्व हमला बताया और कहा कि इस तरह के हमले की कल्पना भी नहीं की गई थी, खासकर रमजान के महीने में।

यूरोप और एशिया पर पड़ेगा असर

कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक है और इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को गैस सप्लाई करता है।

अब उत्पादन प्रभावित होने के कारण इन देशों में गैस की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कतरएनर्जी ने लंबी अवधि के कई अनुबंधों पर 'फोर्स मेज्योर' लागू करने की बात भी कही है।

एक्सॉनमोबिल और शेल भी प्रभावित

हमले में जिन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, उनमें अमेरिकी कंपनी एक्सॉनमोबिल और ब्रिटिश कंपनी शेल की भी हिस्सेदारी है।

बताया गया है कि एक्सॉनमोबिल LNG प्लांट में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, जबकि शेल GTL सुविधा से जुड़ी हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों पर भी असर पड़ना तय है।

सिर्फ LNG ही नहीं, अन्य उत्पाद भी प्रभावित

इस हमले का असर सिर्फ LNG तक सीमित नहीं है। कतर के कंडेनसेट उत्पादन में करीब 24% की गिरावट आ सकती है, जबकि एलपीजी उत्पादन में 13% तक कमी का अनुमान है।

इसके अलावा हीलियम, नैफ्था और सल्फर जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित होगी, जिसका असर कई उद्योगों पर पड़ सकता है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगी अनिश्चितता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। गैस की कीमतों में उछाल आ सकता है और कई देशों को वैकल्पिक सप्लाई के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

कतरएनर्जी के सीईओ ने भी कहा कि इस तरह के हमले से पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं और इससे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी।

ईरान के हमले के बाद कतर की LNG इंडस्ट्री को लगा यह झटका सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो कतर की गैस पर निर्भर हैं। आने वाले समय में यह संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय कर सकता है।