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भयावह बारिशः ये जलवायु परिवर्तन नहीं, दो जलवायु कारकों के एक साथ घटित होने का है नतीजा

उत्तर भारत में पिछले 48 घंटों में हो रही भारी बारिश दो जलवायु कारकों के एक साथ घटित होने का नतीजा है। ये कुछ उसी तरह के हालात हैं, जैसे उत्तराखंड में 2013 की हिमालयन सुनामी के दौरान पैदा हुए थे, जिसके कारण जानलेवा केदारनाथ की बाढ़ देखने को मिली थी।

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उत्तर भारत में पिछले 48 घंटों में हो रही भारी बारिश दो जलवायु कारकों के एक साथ घटित होने का नतीजा है। ये कुछ उसी तरह के हालात हैं, जैसे उत्तराखंड में 2013 की हिमालयन सुनामी के दौरान पैदा हुए थे, जिसके कारण जानलेवा केदारनाथ की बाढ़ देखने को मिली थी। इन दोहरे मौसमी कारकों के एक साथ घटित होने के कारण दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 153 एमएम बारिश रविवार को देखने के मिली, जो कि 1982 के बाद रेकॉर्ड बारिश है।


अब उत्तर पूर्व राजस्थान के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र
मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हालिया भारी बारिश मानसूनी हवाओं के वेस्टर्न डिस्टरबेंस के मिल जाने से हुई है, जिसके कारण हिमाचल प्रदेश के ऊपर के कम दबाव का वलय निर्मित हुआ है। आइएमडी का ताजा अनुमान ये है कि अब ये कम दबाव का क्षेत्र उत्तर पूर्व राजस्थान और पड़ोसी क्षेत्रों में बना हुआ है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसूनी स्थितियां भारत के लिए पूरी तरह सामान्य हैं, लेकिन लेकिन पश्चिमी डिस्टरबेन्स और मानसूनी हवाओं के मिल जाने से बारिश की तीव्रता और इसका फैलाव प्रभावित हुआ है।

आगामी 36 घंटे भारी
मौसम विभाग ने कहा है कि पश्चिमी डिस्टरबेंस और मानसूनी हवाओं में ये तालमेल आगामी 24 से 36 घंटे तक बने रहने के आसार हैं, जिसके कारण उत्तरी पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।