
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 7 महीनों से लगातार युद्ध चल रहा है। इस युद्ध के कराण यूक्रेन के कई शहरों को रूस ने तबाह कर दिया है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की चेतावनी को दोहराया है। उनके इस बयान पर कई देशों की प्रतिक्रियाएं आई हैं। इस बीच ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई है कि रूसी एयरलाइंस ने 18 से 65 साल के बीच की उम्र के पुरुषों के लिए टिकट बुक पर रोक लगा दी है। लोग कार से या एयरलाइंस से देश छोड़ने के लिए आमदा हैं। बार्डर देशों पर कारों की लंबी लाइन देखी जा रही है। एयरलाइंस को डर है कि देश में कभी भी मार्शल लॉ लगाया जा सकता है। दरअसल, पुतिन ने आर्थिक लामबंदी पर हस्ताक्षर करके ऐलान कर दिया है कि रिजर्विस्ट यानी आरक्षित सैनिकों की तैनाती की जाएगी।
अब तक 1300 से अधिक गिरफ्तार
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा यूक्रेन में लड़ने के लिए नागरिकों की आंशिक लामबंदी की घोषणा के बाद पुलिस अधिकारियों ने मास्को में कई प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिया गया। बुधवार को पूरे रूस में 1,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को रूसी नागरिकों की तत्काल "आंशिक लामबंदी" की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से ही लोगों में गुस्सा है और रूस के लोग इस घोषणा का विरोध कर रहे हैं।
पुतिन ने भाषण में की थी घोषणा
पुतिन ने एक भाषण में कहा था कि वह हमारे पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करेंगे और यहां तक कि परमाणु हथियारों के खतरे को भी बढ़ाएंगे, अगर वह रूस की क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालता है। पुतिन ने कहा कि लामबंदी का मतलब है कि रिजर्व में रहने वाले नागरिकों को बुलाया जा सकता है, और सैन्य अनुभव वाले लोग भर्ती के अधीन होंगे।
विरोध प्रदर्शन पर 15 साल की जेल
मॉस्को के अभियोजक के कार्यालय ने बुधवार को चेतावनी दी कि अनधिकृत सड़क विरोध में शामिल होने के लिए इंटरनेट पर कॉल करने या उनमें भाग लेने पर 15 साल तक की जेल हो सकती है। उन पर सशस्त्र बलों को बदनाम करने, यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान के बारे में "फर्जी समाचार" फैलाने या नाबालिगों को विरोध करने के लिए प्रोत्साहित करने के खिलाफ कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इस तरह यूक्रेन युद्ध के बारे में "गलत सूचना" फैलाने और पुतिन विरोधी कार्यकर्ताओं के पुलिस उत्पीड़न के लिए रूस के कड़े दंड ने सार्वजनिक युद्ध-विरोधी विरोध प्रदर्शनों को दुर्लभ बना दिया है।
Published on:
22 Sept 2022 05:21 pm
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