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युवाओं की खुशी का ‘नया दुश्मन’ बना सोशल मीडिया

आज के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफी ज़्यादा किया जाता है। लेकिन इसका युवाओं की खुशी पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 20, 2026

Youngsters using social media

Youngsters using social media (Representational Photo)

स्मार्टफोन की चमकती स्क्रीन पर सोशल मीडिया (Social Media) का अंतहीन ‘स्क्रॉल’ और हर कुछ सेकंड में बजता नोटिफिकेशन…आज के इस दौर में यह एक आदत बन गई है। दुनियाभर में लोग सोशल मीडिया का काफी ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं। बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग, हर उम्र के लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। हालांकि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि यह नई पीढ़ी की खुशी को धीरे-धीरे खा रहा एक ‘साइलेंट खतरा’ बन चुका है।

युवाओं की खुशी का 'नया दुश्मन' बना सोशल मीडिया

गैलप के एक लाख लोगों के सर्वे पर आधारित यूएन-समर्थित 'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026' ने दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची जारी करते हुए युवाओं के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के बीच गहरे रिश्ते को उजागर किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया युवाओं की खुशी का 'नया दुश्मन' बन गया है।

लोगों में बढ़ रहा है अकेलापन

सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे समृद्ध देशों में भी युवाओं की जीवन संतुष्टि तेजी से घटी है। लोगों की खुशी कम हो रही है। वजह है डिजिटल तनाव और ‘वर्चुअल दुनिया’ में बढ़ता अकेलापन, जिससे लोगों का असल जीवन में भी अकेलापन बढ़ रहा है।

डिजिटल तनाव बन रहा ‘स्लो पॉइज़न’

एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों में सोशल मीडिया की वजह से बढ़ रहा अकेलापन ‘डिजिटल अलगाव’ का नतीजा है, जहाँ कनेक्टिविटी बढ़ी, लेकिन असली रिश्ते कमजोर पड़ गए। जो युवा हर दिन 5 घंटे या उससे ज़्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, वो कम खुश पाए गए। इसके उलट दिन में सोशल मीडिया का 1 घंटे से कम इस्तेमाल करने वाले युवाओं का ‘वेल-बीइंग’ स्तर काफी बेहतर रहा।'

फिनलैंड लगातार 9वीं बार नंबर-1

डिजिटल तनाव से दूर खुशहाली की दौड़ में फिनलैंड ने लगातार नौवीं बार पहला स्थान हासिल कर ‘खुशी की राजधानी’ होने का तमगा बरकरार रखा है। मज़बूत सामाजिक सहयोग, पारदर्शी शासन व आर्थिक समानता इसके मूल में है। वहीँ अफगानिस्तान लगातार दुनिया का सबसे नाखुश देश बना हुआ है। लंबे समय से युद्ध, आतंकवाद और आंतरिक संघर्ष झेल रहे अफगानिस्तान में स्थिति काफी खराब है। तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से तो देश में स्थिति काफी बदतर हो गई है। लोगों पर तरह-तरह की पाबंदियाँ लगा दी गई हैं। महिलाओं का जीवन तो काफी मुश्किल हो गया है।