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ये फेक न्यूज, आप अपने पत्रकारों से जांच करवा लें- नरेंद्र मोदी से बोले बांग्लादेश के युनूस

युनूस ने मोदी से आग्रह किया कि वे अपने पत्रकारों को बांग्लादेश भेजें ताकि इन कथित हमलों की सच्चाई की जांच स्वयं की जा सके।

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भारत

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Anish Shekhar

Apr 05, 2025

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जताई गई चिंता के जवाब में बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार युनूस ने एक साहसिक और स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि "अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें बेहद अतिरंजित थीं" और "इनमें से अधिकांश फेक न्यूज थीं।" युनूस ने मोदी से आग्रह किया कि वे अपने पत्रकारों को बांग्लादेश भेजें ताकि इन कथित हमलों की सच्चाई की जांच स्वयं की जा सके। यह बयान न केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को उजागर करता है, बल्कि सूचना के युग में सत्य और अफवाह के बीच की जटिल लड़ाई को भी रेखांकित करता है।

ढाका से जारी बयान में कहा गया, "मुख्य सलाहकार ने बताया कि उन्होंने देश में धार्मिक और लैंगिक हिंसा की हर घटना पर नजर रखने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था स्थापित की है, और उनकी सरकार ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए गंभीर कदम उठा रही है।" यह दावा बांग्लादेश सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करने की कोशिश को दर्शाता है।

शेख हसीना को लेकर क्या बोला बांग्लादेश

बांग्लादेश सरकार के बयान के अनुसार, "भारतीय प्रधानमंत्री ने शेख हसीना के बयानों को लेकर उत्पन्न तनाव के लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत का लगाव किसी देश से है, न कि व्यक्तियों या राजनीतिक संगठनों से।" मोदी ने यह भी स्पष्ट किया, "भारत किसी खास पार्टी का समर्थन नहीं करता। हमारा रिश्ता लोगों से लोगों का है।" यह कथन भारत की उस नीति को प्रतिबिंबित करता है जो पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को प्राथमिकता देती है, न कि किसी राजनीतिक दल विशेष के साथ संबद्धता को।

हालांकि, भारतीय सरकार के आधिकारिक बयान में इस बात का कोई उल्लेख नहीं था। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, "जहां तक शेख हसीना का सवाल है- और इस संदर्भ में बांग्लादेश की ओर से जो उल्लेख किया गया- हां, यह मुद्दा चर्चा के दौरान उठा था। जैसा कि हमारे प्रवक्ता ने पहले आपको बताया, हमें इस मुद्दे पर एक संचार प्राप्त हुआ है। इस समय इस पर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।" मिसरी का यह जवाब कूटनीतिक संयम और संवेदनशीलता का परिचय देता है, जो इस मामले की जटिलता को और गहरा करता है। यह संवाद न केवल भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों की गतिशीलता को उजागर करता है, बल्कि सूचना के प्रसार, सत्य की खोज और अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वास बनाए रखने की चुनौतियों को भी सामने लाता है।