इस फैसले को यूएई की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यूएई अपने उत्पादन स्तर, निर्यात और वैश्विक ऊर्जा साझेदारी को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल, इस ऐलान ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।