
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क। (फोटो: ANI .)
Gaza humanitarian crisis: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क (Volker Turk) ने गाजा की स्थिति पर एक बहुत गंभीर बयान दिया(Gaza humanitarian crisis) है। उन्होंने गाजा को ‘कब्रिस्तान’ बताया है और इजराइल के अधिकारियों की बयानबाजी की कड़ी निंदा की है। तुर्क ने कहा कि इजराइल की ओर से जो बयान दिए जा रहे हैं, वे नरसंहार को बढ़ावा देते हैं और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई करने की जरूरत है। तुर्क ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN human rights chief) के सत्र में कहा कि गाजा (Gaza conflict 2025) में फिलिस्तीनी नागरिकों की सामूहिक हत्या हो रही है। उन्होंने (Israeli statements on Gaza) कहा कि वहां बहुत ज्यादा पीड़ा और विनाश हो रहा है, जिससे हालात बहुत खराब हो गए हैं। उन्होंने बताया कि जीवन रक्षक सामग्री तक पहुंचने में बाधाएं डालने के कारण लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। साथ ही, पत्रकारों, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों और गैर-सरकारी संगठनों के सदस्यों की जान भी खतरे में है।
उन्होंने इस स्थिति को पूरी दुनिया के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि वे इजरायली अधिकारियों द्वारा खुलेआम नरसंहार की बातों से डर गए हैं। तुर्क ने कहा कि गाजा में हो रही मौतें अमानवीय हैं और इस पर पूरी दुनिया को ध्यान देना चाहिए।
तुर्क ने बताया कि 7 अक्टूबर, 2023 को जब हमास ने इजराइल पर हमला किया था, तब से यह युद्ध शुरू हो गया है। अब लगभग दो साल बाद भी गाजा में स्थिति बहुत खराब है और वहां के लोग शांति के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज गाजा एक कब्रिस्तान बन चुका है।”
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने इजराइल को उसका कानूनी दायित्व भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश के अनुसार, इजरायल को नरसंहार रोकना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देनी चाहिए। साथ ही गाजा के लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने का काम भी करना चाहिए।
तुर्क ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे नरसंहार रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब तक अपने कर्तव्यों में नाकाम रहा है और ऐसी स्थिति में चुप रहना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि अब और इंतजार करना नुकसानदेह हो सकता है।
बहरहाल गाजा में हो रही मौतों और विनाश की खबरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बहुत जरूरी हो गया है ताकि वहां फंसे लोगों को राहत मिल सके और हिंसा रोकी जा सके।
Updated on:
08 Sept 2025 05:18 pm
Published on:
08 Sept 2025 05:17 pm

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