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ईरान से बातचीत के लिए ट्रंप की दो शर्तें, मानने पर ही खत्म होगा युद्ध

Iran US Conditions: अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए वार्ता को लेकर ट्रंप ने कड़े रुख और नई शर्तों के साथ दबाव बढ़ाया है।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 15, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (ANI)

US Iran War: अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच चल रही कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। बढ़ते सैन्य तनाव और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बिगड़ने के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले 48 घंटों में बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब युद्धविराम की समयसीमा खत्म होने के करीब है और कूटनीति को पटरी पर लाने के लिए समय बेहद सीमित माना जा रहा है।

बातचीत की सबसे बड़ी शर्त

अमेरिका की नई शर्तों में सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां मौजूदा तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। वॉशिंगटन ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर नौसैनिक नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य तेहरान के तेल निर्यात को सीमित करना और वार्ता में अपनी स्थिति मजबूत करना है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी देश को दुनिया को ब्लैकमेल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि नाकेबंदी के करीब आने वाले जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन शर्तों की आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।

क्यों विफल हुई पिछली बातचीत?

इससे पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत कई मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण विफल हो गई थी। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद सामने आए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलासा किया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं था। उनके अनुसार प्रतिनिधिमंडल को हर फैसले के लिए तेहरान से मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका अपनी रेड लाइन्स स्पष्ट कर चुका है और अब अगला कदम ईरान को उठाना है।

ईरान की मजबूत रणनीति

ईरान ने इस बार बातचीत को हल्के में नहीं लिया, बल्कि पूरी तैयारी और गंभीरता के साथ कदम उठाया। उसने पाकिस्तान में एक बहु-स्तरीय और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा, जिसमें सैन्य, आर्थिक, कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ताकारों को दो विमानों में भरकर भेजा गया और इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सदस्य भी शामिल थे। इसके साथ ही, 100 से अधिक पन्नों का एक विस्तृत तकनीकी दस्तावेज भी तैयार किया गया। इन सभी कदमों से यह स्पष्ट होता है कि ईरान इस बातचीत में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी तरह से गंभीर और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका ने भी बदली रणनीति

इस बार अमेरिका ने अपनी टीम को पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 300 अधिकारियों की टीम तैनात की गई है और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी इसमें शामिल किया गया है। साथ ही, अनुभवी ईरानी वार्ताकारों जैसे मोहम्मद बाघेर और अब्बास अरघची का सामना करने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है। ये सभी बदलाव इस बात का संकेत देते हैं कि अमेरिका अब बातचीत को अधिक गंभीरता और बेहतर तैयारी के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।