दरअसल, ईरान ने एक अहम रुख अपनाया है। वह सीधे तौर पर अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता। इसके बजाय वह पाकिस्तान को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यानी संदेश भी वहीं से जाएगा और बातचीत की दिशा भी काफी हद तक उसी पर निर्भर करेगी। दिलचस्प बात ये रही कि इस्लामाबाद में बातचीत के बाद अराघची सीधे मस्कट पहुंच गए थे। ओमान पहले भी कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच। वहां उन्होंने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की। बातचीत का फोकस साफ था। तनाव कम कैसे हो और किसी संभावित टकराव को रोका कैसे जाए।