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US Iran Talk: दो दिन में दूसरा पाकिस्तान दौरा, ईरान के विदेश मंत्री फिर से पहुंचे इस्लामाबाद

US Iran War: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का पाकिस्तान दौरा, अमेरिका से अप्रत्यक्ष बातचीत की कोशिशें, ओमान की मध्यस्थ भूमिका और क्षेत्रीय तनाव पर कूटनीतिक हल तलाशने की कवायद तेज।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 26 Apr 2026, 9:29 PM IST

US Iran Talk

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

Iran Foreign Minister Abbas Araghchi: ईरान की कूटनीति इन दिनों काफी सक्रिय नजर आ रही है। इसी सिलसिले में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। खास बात ये है कि यह उनका महज दो दिनों के भीतर दूसरा दौरा है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय हालात को लेकर तेजी से बातचीत चल रही है। इस बार के दौरे में अराघची की मुलाकात पाकिस्तान के कई बड़े नेताओं से होने की उम्मीद है। इससे पहले शनिवार को उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत की थी। उस बैठक में ईरान ने अपनी शर्तें साफ तौर पर रखीं और साथ ही अमेरिका की कुछ मांगों पर अपनी आपत्तियां भी जाहिर कीं।

जानें डिटेल्स


दरअसल, ईरान ने एक अहम रुख अपनाया है। वह सीधे तौर पर अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता। इसके बजाय वह पाकिस्तान को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यानी संदेश भी वहीं से जाएगा और बातचीत की दिशा भी काफी हद तक उसी पर निर्भर करेगी। दिलचस्प बात ये रही कि इस्लामाबाद में बातचीत के बाद अराघची सीधे मस्कट पहुंच गए थे। ओमान पहले भी कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच। वहां उन्होंने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की। बातचीत का फोकस साफ था। तनाव कम कैसे हो और किसी संभावित टकराव को रोका कैसे जाए।

अमेरिका का क्या है रुख?


इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका का रुख थोड़ा अलग दिखाई देता है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका पाकिस्तान के जरिए होने वाली इस बातचीत प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं होगा। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि अमेरिका अपनी अलग रणनीति पर काम कर रहा है या फिर वह इस तरीके से पूरी तरह सहमत नहीं है।ये पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति इस समय काफी संवेदनशील मोड़ पर है। बातचीत जारी है, लेकिन रास्ता अभी भी साफ नहीं दिख रहा। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि आगे यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में जाता है। तनाव घटता है या हालात और जटिल होते हैं।