लेकिन अमेरिका के बाहर निकलते ही हालात बदल गए। ईरान ने धीरे-धीरे उन सीमाओं को तोड़ना शुरू कर दिया, जो उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को कंट्रोल में रखती थीं, ईरान ने न्यूक्लियर पॉवर बनने की छह में धीरे-धीरे अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं। अब जब ट्रंप दोबारा ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को काबू में लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें पहले से कहीं ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पुराने फैसले के असर आज साफ दिख रहे हैं, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।