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ईरान के दो ठिकानों पर अमेरिका का बड़ा हमला, ड्रोन-रडार साइट तबाह, सेना ने कहा- हमारा बदला पूरा हुआ

US Military Action Iran: ईरान द्वारा अमेरिकी MQ-1 ड्रोन मार गिराने के बाद यूएस ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका इसे जवाबी कार्रवाई बता रहा है।
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भारत

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Saurabh Mall

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Updated: 1 Jun 2026, 11:31 AM IST

US Military Action Iran

ईरान को अमेरिका का करारा जवाब, ड्रोन हमले के बाद गोरुक और केशम पर बमबारी (सोर्स: एक्स यूजर Ebrahim Zolfaghari )

American Forces Attack Iran: अमेरिका ने ईरान पर अटैक कर दिया है। ईरानी सेना द्वारा अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराए जाने के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के दो अहम ठिकानों गोरुक और केशम पर जोरदार हमले किए।

अमेरिका ने इन हमलों को आत्मरक्षा बताया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान की आक्रामक कार्रवाइयों के खिलाफ यह जरूरी जवाबी कार्रवाई थी। दोनों द्वीपों पर स्थित ईरानी ठिकानों, खासकर ड्रोन और रडार साइटों को निशाना बनाकर हमले किए गए।

यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने दी जानकारी

यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ड्रोन घटना के बाद तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणालियों, एक नियंत्रण केंद्र और दो हमलावर ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। ‘CENTCOM’ का कहना है कि ये ड्रोन क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। अमेरिका ने इस कार्रवाई को सीमित और सावधानीपूर्वक उठाया गया कदम बताया और कहा कि इसका उद्देश्य केवल आत्मरक्षा था। कमान ने यह भी बताया कि अभियान में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा और अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

ईरान ने किया था अमेरिकी MQ-1 ड्रोन मार गिराने का दावा

ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, ईरानी सेना (IRGC) ने दावा किया है कि उसने रविवार सुबह अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया।

सेना के मुताबिक, उनकी निगरानी प्रणाली ने ड्रोन की तुरंत पहचान कर ली और उसे नष्ट कर दिया। ईरान ने इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि यह अमेरिकी ड्रोन"हमले या जासूसी के इरादे से उनके क्षेत्र में दाखिल हुआ था।

मुझे बस एक ही गारंटी चाहिए: ट्रंप

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले संघर्ष-विराम समझौते में और बदलावों की मांग की है। इस समझौते के मसौदे में 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और परमाणु बातचीत शुरू करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस की बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। ट्रंप ने साफ किया कि उनकी मुख्य शर्त ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है और उन्हें इस समझौते की कोई जल्दी नहीं है। उन्हें सिर्फ गारंटी चाहिए।

दूसरी ओर, ईरान भी कड़े रुख पर अड़ा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें स्पष्ट गारंटी नहीं मिलती और उनके अधिकारों की रक्षा नहीं होती, वे समझौता नहीं करेंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अभी चल रही बातों को महज अटकलें बताया है।