
नई दिल्ली। गृहयुद्ध की आंच में झुलस रहे सीरिया पर बीते एक हफ्ते में अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से सौ से भी ज्यादा मिसाइल हमले किए गए हैं। अमरीका ने हमले की बात भी कबूल की है। अमरीका के हमलों के पीछे एक खास मकसद है, जो हमले का शिकार हुई जगहों से स्पष्ट होता है। अमरीकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस का कहना है कि ये हमले सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियारों को खत्म करने के लिए किया गया था।
ये हैं वो तीन जगह जिन्हें अमरीका ने निशाना बनाया
साइंटिफिक रिसर्च एंड स्टडी सेंटर, बार्जेहः सीरियाई सरकार के मुताबिक, इस शोध केंद्र का मकसद है देश के विकास से जुड़े विज्ञान मामलों के कार्यक्रमों पर नज़र रखना है। इस एक इलाके में कुल 76 मिसाइलें गिराई गई हैं। अमरीकी सेना की ज्वाइंट कमांड के निदेशक जनरल मैकेंजी का कहना है कि मिसाइल से हमला करके अमरीका ने सीरिया के केमिकल हथियार बनाने के कार्यक्रम को कई वर्षों के लिए पीछे धकेल दिया गया है।
शिनशहर, होम्सः ये सरीन गैस बनाने के लिए खास रसायन जुटाने वाली टीम की मुख्य जगह थी। इन्हीं से मिलाकर सरीन गैस और मस्टर्ड गैस जैसे केमिकल हथियार बनाए जाते हैं। जनरल केनेथ मैकेन्जी के अनुसार इसे लक्ष्य बनाकर 22 मिसाइलें दागी गई थीं।
पश्चिमी होम्सः अमरीकी अधिकारी डनफोर्ड के मुताबिक, 'सात किलोमीटर के दायरे में फैले इस इलाके में केमिकल हथियारों को रखा जाता था और ये एक महत्वपूर्ण कमांड पोस्ट भी था। इस बंकर को नष्ट करने के लिए सात मिसाइलें दागी गई थीं।
'रूस पर सबूत छिपाने में मदद का आरोप'
अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन का आरोप है कि सीरिया के डूमा में हुए रासायनिक हमले के लिए बशर-अल-असद सरकार जिम्मेदार है। इनके मुताबिक रासायनिक हमले के सबूत छिपाने के लिए रूस भी सीरिया की मदद करता रहा है। हालांकि सीरिया की सरकार अपने ऊपर लग रहे इन आरोपों का लगातार खंडन करती रही है। सीरिया का कहना है कि 2013 में हुए सरीन हमले के बाद उसने रासायनिक हथियारों को नष्ट कर दिया है। इसके साथ ही रूस ने भी सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ से इनकार किया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक साक्षात्कार में गारंटी देते हुए कहा कि रूस ने उस जगह पर कोई छेड़छाड़ नहीं की है।'
Published on:
20 Apr 2018 11:04 am

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