
अमरीकी सीनेट में बुधवार को निर्यात नियंत्रण अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन पारित नहीं हो सका, जो भारत के लिए झटका माना जा रहा है। सीनेट में इस प्रस्ताव के पारित नहीं होने से भारत अब अमरीका का वैश्विक रणनीतिक और रक्षा भागीदार नहीं बन सकेगा।
लेकिन इस बीच अमरीकी विदेश मंत्रालय ओर से स्पष्टीकरण भी जारी किया गया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमरीकी सीनेट में हुए एक महत्वपूर्ण संशोधन के पारित होने के बावजूद भारत उसका प्रमुख रक्षा भागीदार बनने का दर्जा नहीं खोयेगा।
सरकार के सूत्रों के मुताबिक़ अमरीकी सीनेट के ताजा संशोधन से हमारे प्रमुख रक्षा भागीदार बनने के दर्जे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 7 जून को अमरीकी के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत को अपना प्रमुख रक्षा भागीदार बताया था। इसमें दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधी व्यापार एवं तकनीकी हस्तांतरण का समर्थन किया गया था।
संयुक्त बयान के अनुसार, अमरीका भारत को एक प्रमुख रक्षा साझीदार मानता है। इसमें कहा गया कि अमरीका अपने करीबी सहयोगी देशों और साझेदारों के समान स्तर पर भारत के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी की दिशा में काम करता रहेगा। दोनों पक्षों ने एक रोडमैप को अंतिम रूप दिया जिसके तहत भारत अमरीका की रक्षा और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी तक बेहतर और लाइसेंस मुक्त पहुंच बना सकता है।
Published on:
16 Jun 2016 12:05 pm
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