
मोहम्मद बिन जायद, UAE राष्ट्रपति (फोटो-IANS)
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जंग के मुहाने पर खड़े हैं। इसी बीच आज UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत दौरे पर आने वाले हैं। MBZ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा और दुनिया से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। वहीं, सउदी अरब संग तकरार बढ़ने के बाद वह भारत संग करीबी बढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि सउदी अरब पाकिस्तान व तुर्किये के साथ इस्लामिक नाटो की तैयारी में जुटा है।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात कई वैश्विक मंचों पर भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने MBZ के दौरे को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर मजबूत साझेदारी है। साथ ही, लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम और बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी ने आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी है। मंत्रालय ने कहा कि भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाने तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग के नए रास्ते खोलने का अवसर देगा। हम UAE के साथ संयुक्त राष्ट्र, BRICS, I2U2 और UFI जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी करीबी सहयोगी भी हैं। इसके साथ ही, UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है।
भारत के पूर्व राजनायिक केसी सिंह ने कहा कि UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान वह भारत को अपने पाले में करने की कोशिश जरूर करेंगे, लेकिन भारत सउदी या UAE में से किसी एक को चुनने की गलती शायद ही करे। उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि दोनों देशों के साथ भारत के संबंध बेहतर है। ऐसे में एक का चुनाव करना सीधे तौर पर दूसरे दुश्मनी मोल लेने के जैसा होगा। उन्होंने कहा कि इससे उन देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों पर भी असर पड़ेगा, जो भारी तादाद में मौजूद हैं।
सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच हालिया तनाव मुख्य रूप से यमन में उत्पन्न हुआ है। दिसंबर 2025 में UAE समर्थित साउदर्न ट्रांजिशन काउंसिल (STC) ने दक्षिणी और पूर्वी यमन (हधरमौत, अल-महरा) में बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, जो सऊदी सीमा के निकट है। सऊदी अरब ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना और इसे UAE द्वारा समर्थित अलगाववादी गतिविधि बताया।30 दिसंबर 2025 को सऊदी वायुसेना ने मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया, जहां UAE से आए हथियारों और सैन्य उपकरणों का दावा किया गया। सऊदी ने UAE को 24 घंटे में यमन से सेना हटाने का अल्टीमेटम दिया। UAE ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन बाद में अपनी बची हुई सेना वापस बुला ली।
Published on:
19 Jan 2026 12:08 pm
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