
बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण के मामले (Representational Photo)
इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर भारत समेत कई देशों में बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से जुड़े विज्ञापन और नेटवर्क चलाए जा रहे है। अमेरिका (United States of America) के नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में भी ऐसे मामलों को रिपोर्ट करने वाले देशों की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है। वहीँ भारत (India) इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है। इस लिस्ट में इंडोनेशिया (Indonesia) दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान (Pakistan) चौथे स्थान पर है। वहीँ ब्राज़ील (Brazil) पांचवें स्थान पर है।
हाल ही में भारत सरकार ने इन्हें हटाने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को आदेश दिया था। सरकार की सख्ती के बाद मेटा ने बच्चों के शोषण को एक भयानक अपराध बताया। मेटा के ब्लॉग में कहा गया है कि कंपनी अपने प्लेटफ़ॉर्म पर और उसके बाहर भी इस तरह के शोषण के ख़िलाफ ज़ोर-शोर से काम कर रही है। सरकार के नोटिस के बाद, मेटा ने एक ब्लॉग लिखकर बताया है कि कंपनी अपने ऐप्स पर बच्चों के शोषण को रोकने के लिए क्या-क्या कोशिशें कर रही हैं। साथ ही मेटा ने सुरक्षा उपायों और ऐड रिव्यू सिस्टम की जानकारी भी दी है।
मेटा समेत कई बड़ी टेक कंपनियाँ अपने प्लेटफॉर्म पर चल रही सीएसएएम संबंधित सामग्री की रिपोर्ट अमेरिकी एजेंसी को भेजती हैं। इसके बाद यह जानकारी संबंधित देशों की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को भेजी जाती है, जिससे मामले की जांच की जा सके और कार्रवाई हो सके। हालांकि ये मामले संदिग्ध भी होते हैं। इसी कारण इन्हें संबंधित एजेंसियों को भी जांच के लिए भेजा जाता है।
ऑनलाइन सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ ही परिवार की भी ज़िम्मेदारी है। ऐसे में सोशल मीडिया कंपनियों, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और अभिभावकों को मिलकर काम करना होगा। साथ ही संदिग्ध सामग्री की तेज़ी से पहचान, उसकी रिपोर्टिंग और उसे इंटरनेट से हटाने की प्रक्रिया को और मज़बूत बनाने की भी ज़रूरत है।
भारत में बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े मामलों की संख्या पर गौर किया जाए, तो 2021 में यह 47 लाख थी। 2022 में यह संख्या बढ़कर 56.8 लाख हो गई। 2023 में यह संख्या और बढ़कर 89.2 लाख हो गई। हालांकि 2024 में इस संख्या में गिरावट देखने को मिली और यह घटकर 22.5 लाख रह गई। 2025 में भी इस संख्या में गिरावट देखने को मिली और यह घटकर 19.3 लाख रह गई।
Updated on:
09 Jul 2026 03:18 am
Published on:
09 Jul 2026 03:18 am
