
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और निकोलस मादुरो। (फोटो: पत्रिका)
US attack on Venezuela: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला (Trump Venezuela Airstrike news)की धरती आज बारूद के धमाकों और फाइटर जेट्स की गर्जना से कांप उठी ((Caracas explosions January 2026))है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। काराकास के आसमान में उठते धुएं के गुबार और सैन्य ठिकानों पर गिरती मिसाइलें इस बात के गवाह हैं कि अमेरिका अब निकोलस मादुरो के शासन का अंत करने के लिए 'सद्दाम हुसैन स्टाइल' की रणनीति अपना चुका है। ट्रंप के तीखे तेवर (US attack on Venezuela) साफ बता रहे हैं कि अब कूटनीति के दिन खत्म हो गए हैं और युद्ध की शुरुआत हो चुकी है।
इस विनाशकारी संघर्ष की नींव पिछले साल 16 नवंबर को ही पड़ गई थी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं निकोलस मादुरो को फोन कर एक अंतिम अल्टीमेटम (Trump Maduro Ultimatum) दिया था। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा था, "तुम खुद को और अपने परिवार को बचा सकते हो, लेकिन इसके लिए तुम्हें इसी वक्त देश छोड़ना होगा।"अब उन्होंने दावा किया है कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को पकड़ लिया गया है। ध्यान रहे कि अमेरिका ने 16 नवंबर को मादुरो, उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स और उनके बेटे के लिए सुरक्षित निकासी (Safe Passage) का रास्ता देने की पेशकश की थी।
मादुरो ने इस सुनहरे मौके को ठुकरा दिया। मादुरो ने बदले में 'वैश्विक क्षमा' और सेना पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने की जिद पकड़ ली। मादुरो की इस हठधर्मी ने बातचीत के सारे दरवाजे बंद कर दिए और जंग को अपरिहार्य बना दिया।
शनिवार तड़के, जब पूरा वेनेजुएला सो रहा था, अमेरिकी मिसाइलों ने काराकास के सबसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। 'फुएर्ते तिउना' (Fuerte Tiuna) और 'ला कार्लोटा' एयरबेस पर हुए भीषण धमाकों ने मादुरो के सुरक्षा कवच की धज्जियां उड़ा दीं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि यह एक "बड़े पैमाने पर किया गया हमला" (Large Scale Strike) था।
अब यह चर्चा आम है कि क्या मादुरो को पकड़ा जा चुका है या वे किसी गुप्त बंकर में छिपे हुए हैं। अब मादुरो के बारे में यह दावा कि वो ट्रंप की गिरफ्त में हैं, कई सवाल पैदा करता है। ट्रंप की इस कार्रवाई ने 2003 के इराक युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं, जब सद्दाम हुसैन के खिलाफ भी ऐसी ही "शॉक एंड ऑ (Shock and Awe)" रणनीति अपनाई गई थी।
इतिहास खुद को दोहराता हुआ दिख रहा है। जिस तरह सद्दाम हुसैन को पकड़ने के लिए अमेरिका ने इराक में पूरी ताकत झोंक दी थी, वैसा ही मंजर आज वेनेजुएला में है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि मादुरो शासन 'नार्को-टेररिज्म' का केंद्र बन गया है, जो अमेरिका के लिए खतरा है। मादुरो द्वारा 'सेफ पैसेज' के ऑफर को ठुकराना उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक भूल मानी जा रही है। अब स्थिति यह है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर मादुरो को सत्ता से बेदखल करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अदालत के सामने खड़ा करने के मूड में है।
इस हमले ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। ईरान ने इसे "अमेरिकी आतंकवाद" करार दिया है, जबकि रूस और चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। रूस ने चेतावनी दी है कि उसके $S-300$ मिसाइल सिस्टम वेनेजुएला की रक्षा के लिए तैयार हैं। हालांकि, अमेरिकी वायुसेना की गति और तकनीक के आगे क्या ये रूसी हथियार मादुरो को बचा पाएंगे? यह एक बड़ा सवाल है। इस सैन्य कार्रवाई ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी भारी उछाल ला दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने पूरे देश में 'इमरजेंसी' (State of External Commotion) घोषित कर दी है और जनता से "सशस्त्र संघर्ष" के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। लेकिन दूसरी तरफ, ट्रंप की सेना काराकास के दरवाजे पर खड़ी है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि वेनेजुएला एक लंबे गृहयुद्ध की आग में झुलसेगा या मादुरो का अंत भी किसी पुराने तानाशाह की तरह होगा। फिलहाल, दुनिया की सांसें थमी हुई हैं और हर कोई लैटिन अमेरिका के इस नए रणक्षेत्र की ओर देख रहा है।
Updated on:
03 Jan 2026 05:29 pm
Published on:
03 Jan 2026 05:28 pm
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