
वेनेजुएला की सेना पाला बदले तो ही ट्रंप का मिशन पूरा
विपक्ष के नेता ने सेना को अपने पाले में करने के लिए मादुरो के कार्यकाल में हुई आपराधिक घटनाओं के लिए माफी देने का ऐलान किया है। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप वेनेजुएला के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं क्योंकि वे अमरीका को लगातार लडऩे वाले युद्ध की स्थिति में नहीं लाना चाहते हैं। वे कूटनीतिक तरह से वेनेजुएला पर जीत चाहते हैं जिससे अमरीका को नुकसान न हो।
अमरीका कूटनीति ढंग से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करना चाहता है। कुप्रबंधन की वजह से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की बुरी हालत है। इससे शरणार्थियों की संख्या बढऩे के साथ भूखमरी जैसे हालात बन रहे हैं। मादुरो का कार्यकाल दमनकारी और हिंसक हो चुका है। वेनेजुएला चीन, रूस, ईरान और क्यूबा से मदद मांग रहा है। ऐसी स्थिति में ट्रंप की कोशिश है कि मादुरो को अपदस्थ कर देश में लोकतंत्र की स्थापना की जाए। कयास लगाए जा रहे हैं कि टं्रप सेना की मदद से वेनेजुएला की सत्ता बदलने की कोशिश कर सकते हैं।
इसका अंदेशा इस बात से होता है कि अमरीकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जॉन बोल्टन ने कहा है कि वेनेजुएला के पड़ोसी मुल्क कोलंबिया में 5 हजार अमरीकी सैनिकों की तैनाती होगी। इसी बीच सीनेटर मार्को रूबियो ने कहा है कि मादुरो सत्ता नहीं छोड़ते हैं तो उनकी हालत सीरिया के पूर्व तानाशाह मो. गद्दाफी जैसी हो जाएगी।
गद्दाफी को अमरीका ने ही सत्ता से बेदखल किया था जिसके बाद उनके दुश्मनों ने ही उन्हें मार दिया था। वेनेजुएला की सत्ता में कमजोर कड़ी बन चुके मादुरो पर अमरीकी सेना भारी पड़ सकती है। वे ऐसी रणनीति के तहत काम करेगी जिससे वेनेजुएला की सेना को भी पाला बदलना पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन को बखूबी पता है कि वेनेजुएला की राजनीति में वहां की सेना का अहम योगदान है। अगर सेना मादुरो के प्रति वफादार रहेगी तो वे सत्ता में बने रहेंगे। अगर सेना पाला बदलती है या सरकार का साथ देने से मना करती है तो मादुरो का सत्ता से बेदखल होना तय है। ट्रंप की नीति के अनुसार मादुरो सत्ता छोडऩे से और सेना उनका साथ छोडऩे से मना करती है तो अमरीका वही रास्ता अपनाएगा जैसा उसने पहले कुछ अन्य देशों के साथ अपनाया है।
वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत
Published on:
18 Apr 2019 06:11 pm

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