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महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा वेतन पाने में लगेंगे 170 वर्ष

दुनिया वर्ष 2186 तक लैंगिक असमानता से मुक्त हो पाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसर और राजनीतिक सशक्तिकरण के आधार पर 144 देशों में किए गए सर्वे के बाद ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
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Rajeev sharma

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Updated: 27 Oct 2016, 9:59 AM IST

लैंगिक असमानता को कम करने की कोशिशों के बीच वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम के ताजा आंकड़े चिंता जाहिर करने वाले हैं। फोरम के मुताबिक, 2015 में पुरुषों के मुकाबले महिला कर्मचारियों की संख्या और वेतन में जिस प्रकार असमानता रही, यदि यह तेजी से कम नहीं हुई तो लैंगिक असमानता को खत्म होने में 170 वर्ष लग जाएंगे।

यानी दुनिया वर्ष 2186 तक लैंगिक असमानता से मुक्त हो पाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसर और राजनीतिक सशक्तिकरण के आधार पर 144 देशों में किए गए सर्वे के बाद ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

भारत में लैंगिक असमानता में आई कमी

ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में भारत को 87वां स्थान प्राप्त हुआ है। भारत ने पूरी तरह से प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा दाखिले में लैंगिक अंतर को खत्म कर दिया है।

पिछले वर्ष की तुलना में भारत 21 पायदान ऊपर उठा है। भारत का सुधार प्रतिशत 8 फीसदी है। भारत उन दस देशों में शामिल है जिन्होंने अपना प्रतिशत सुधारा है। इन देशों में निकारागुआ 12 फीसदी के साथ सबसे ऊपर व नेपाल ने 11 फीसदी की बढ़त के साथ सूची में 110वीं रैंक हासिल की है।

वेतन में भारी अंतर

पुरुष 13,28,553 रुपए

महिला 7,20,533 रुपए (वार्षिक औसत)

पाक नीचे से दूसरा

पाकिस्तान लैंगिग भेदभाव के मामले में दूसरा सबसे बुरा देश है। पाकिस्तान को 143वां अंक हासिल हुआ है। बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और भूटान को क्रमश: 72वां, 100वां, 115वां और 121वां स्थान मिला है। यमन को 144वां स्थान और सीरिया को 142वां स्थान हासिल हुआ है।