Gopashtami 2018: गोपाष्टमी पर इस विधि से करें गौ, ग्वाल औ कृष्ण की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

Gopashtami 2018: गोपाष्टमी पर इस विधि से करें गौ, ग्वाल औ कृष्ण की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

Tanvi Sharma | Publish: Nov, 15 2018 02:59:48 PM (IST) पूजा

गोपाष्टमी पर इस विधि से करें गौ, ग्वाल औ कृष्ण की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

16 नवंबर, शक्रवार को गोपाष्टमी मनाई जाती है। बर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन विशेष तौर पर गौ, ग्वाल और श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। गाय माता में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता हैं। इसलिए ही श्री कृष्ण ने गाय माता के पूजन आदि के लिए और उनको समाज के अत्याचारों से दूर करने के लिए इस गोपाष्टमी नामक त्यौहार की शुरूआत की। गाय को हिन्दू धर्म में पूजनीय माना गया है। मुख्यतः गोपाष्टमी का महत्व ब्रजवासियों और वैष्णवों के लिए ज्यादा माना जाता है। इस दिन को वे महापर्व के रुप में मनाते हैं। यही वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण पहली बार गौ चारण के लिए निकले थे और इसी दिन से कृष्ण लीला शुरु हुई थी। सबसे पहली बार गौ चारण के कारण से ही इस दिन का नाम गोपाष्टमी पड़ा है। आइए जानते है गोपाष्टमी शुभ मुहूर्त व पूजा विधि...

गोपाष्टमी 2018 तिथि व मुहूर्त
गोपाष्टमी - 15 नवंबर 2018 को सुबह 07:04 से प्रारंभ होकर 16 नवंबर 2018 को सुबह 09:40 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।

gopashtami 2018

यह है गोपाष्टमी पूजन विधि

1. कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें।
2. स्वच्छ होकर गायों को भी स्नान आदि कराएं और गैय्या को मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे लगाएं।
3. इस दिन बछड़े के साथ गाय माता की पूजा करने का विधान है। इसलिए गाय की बछड़े के साथ पूजा करें।
4. ऐसी मान्यता है कि गोपाष्टमी के दिन गाय के नीचे से निकलने वालों को बड़ा पुण्य मिलता है।
5. उसके बाद धूप-दीप, अक्षत, रोली, गुड़, हरी घास, वस्त्र और जल आदि से गाय का पूजन किया जाता है। और कुंजबिहारी की आरती उतारी जाती है।
6. गोपाष्टमी के दिन कई व्यक्ति ग्वालों को उपहार देकर उनका भी पूजन करते हैं।
7. इसके बाद गाय को हरी घास, चारा आदि डालकर परिक्रमा करते हैं।
8. शाम को परिक्रमा के बाद गायों के जंगल से वापस लौटने पर उनके चरणों को धोकर तिलक लगाएं।

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